ओबामा को हाउस में झटका

  • 3 नवंबर 2010
Image caption दक्षिणपंथी टी पार्टी एक ताक़त बन कर उभरी है.

अमरीका में आर्थिक असंतोष के मौसम में रिपब्लिकन पार्टी ने प्रतिनिधि सभा पर क़ब्ज़ा कर लिया है और राष्ट्रपति बराक ओबामा को एक करारा झटका दिया है.

ओबामा की डेमोक्रैटिक पार्टी बड़ी मुश्किल से कांग्रेस के दूसरे सदन यानि सीनेट पर अपना कब्ज़ा बनाए रख सकी हालांकि उन्हें वहां भी छह सीटों का नुकसान हुआ.

हाउस ऑफ़ रिप्रज़ेंटेटिव का रिपब्लिकन खाते में चले जाने का मतलब है कि वो जब चाहें राष्ट्रपति ओबामा के किसी भी प्रस्ताव को पास होने से रोक सकते हैं.

संभावना है कि जॉन बेहनर प्रतिनिधि सभा के स्पीकर या अध्यक्ष बनेंगे.

हार के बाद ओबामा ने बेहनर को फ़ोन किया और उम्मीद जताई कि दोनों ही पार्टियां एक 'साझा ज़मीन' तैयार कर सकती हैं.

उम्मीद की लहरों पर सवार होकर दो साल पहले राष्ट्रपति बने बराक ओबामा के लिए ये हार बड़ा झटका है. अमरीका में अर्थव्यवस्था की धीमी प्रगति और बढ़ती बेरोज़गारी ओबामा की डेमोक्रैटिक पार्टी के ख़िलाफ़ गई है और उनकी अपनी लोकप्रियता में भी कमी आई है.

जिस सीट से राष्ट्रपति बनने से पहले ओबामा सीनेट का चुनाव लड़े थे वो सीट भी रिपब्लिकन खाते में चली गई है.

टी पार्टी

कांग्रेस के काम करने के तरीके पर भी अमरीका में भारी असंतोष है और जिसके फलस्वरूप दक्षिणपंथी टी पार्टी मूवमेंट का उदय हुआ है.

ये सरकार के ख़िलाफ़ तो हैं ही इन्होंने कई जगह रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों को भी प्राइमरी चुनावों के दौरान हराकर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं.

ये पार्टी ज़्यादा टैक्स के ख़िलाफ़ है और आर्थकि सुधारों की पक्षधर है.

औपचारिक तौर पर इनका नाम बैलट पेपर पर नहीं है और न ही इनका कोई केंद्रीय नेतृत्व है और ये रिपब्लिकन टिकट पर ही चुनाव लड़े हैं.

Image caption अमरीकी लोकतंत्र के बारे में कहा जाता है कि वो हमेशा चुनाव की तैयारियों में जुटा रहता है.

इनके सबसे जानेमाने उम्मीदवार हैं रैंड पॉल जिन्होंने केंटकी से सीनेट का सीट जीत लिया है.

वैसे तो टी पार्टी के कई अतिवादी उम्मीदवार हार गए हैं लेकिन बीबीसी के उत्तर अमरीका संपादक मार्क मर्डेल का कहना है कि रिपब्लिकन पार्टी की ये दक्षिणपंथी शाखा एक अहम ताकत बन कर उभरी है.

ओबामा की परेशानी

मर्डेल का कहना है कि ये राष्ट्रपति ओबामा के लिए और परेशानी की बात है क्योंकि भले ही समझौतों और साझा ज़मीन ढूंढने की बात हो टी पार्टी का स्पष्ट एजेंडा है ओबामा के प्रस्तावों को रोकना.

अमरीका में हर दो साल पर बाद मध्यावधि चुनाव होते हैं. इन चुनावों में हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव यानी प्रतिनिधि सभा के सदस्यों और सीनेट के लिए एक तिहाई सदस्यों को चुना जाता है. राष्ट्रपति पद का चुनाव हर चार साल पर होता है.

अभी तक कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रैट्स बहुमत में थे और इसे सरकार चलाने के लिए अच्छा माना जाता है.

अब राष्ट्रपति ओबामा के लिए विधेयक पारित करवाना, प्रशासन में अपनी पसंद के लोगों की नियुक्ति कराना और कांग्रेस से अपनी बातें मनवाना मुश्किल हो सकता है.

साथ ही राष्ट्रपति ओबामा को अपने एजेंडे पर काम करने में बाधाएं आएंगी और अगले राष्ट्रपति चुनाव में उनके दोबारा चुने जाने की संभावना भी कम हो जाएगी.

हालांकि नकारात्मक नतीजों के बाद भी राष्ट्रपति ओबामा को अगले दो साल तक यानी अगले राष्ट्रपति चुनाव तक कोई ख़तरा नहीं है.

इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा के सभी 435 सीटों के लिए मत डाले गए जबकि सीनेट की 100 में से 37 सीटों पर मतदान हुआ है.

इसके अलावा अमरीका के 50 में से 37 राज्यों के गवर्नर भी चुने गए हैं.

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