ज्वालामुखी फटने से 54 की मौत

ज्वालामुखी

इंडोनेशिया के माउंट मेरापी ज्वालामुखी के अभी हाल ही में फटने के बाद अब तक कम से कम 60 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

पिछले हफ़्ते जब से इसमें लावा निकलना शुरु हुआ था तब से यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और मरने वालों की कुल तादाद सौ को पार कर गई है.

आसपास के गाँवों के अनेक लोगों का जलने और साँस की तकलीफ़ के लिए इलाज चल रहा है.

एक अनुमान के अनुसर 75, 000 लोगों को उनके घरों से हटा दिया गया है.

दुनिया के सर्वाधिक सक्रिय ज़्वालामुखियों में से एक माउंट पेरापी मध्य जावा के एक घनी आबादी वाले इलाक़े में स्थित है.

नवीनतम घटना में इसमें से बृहस्पतिवार को लावा का रिसाव शुरु हुआ जब कई ग्रामीणों को चेहरों पर राख की पर्तों के साथ देखा गया.

राहतकर्मियों का कहना है कि आसपास के इलाक़ों में गाँव लपटों से घिरे हुए हैं.

मृतकों में से कई वे बच्चे हैं जो इस क्रेटर से 18 किलोमीटर दूर बसे अर्गोमुयलो गाँव में रहते थे.

स्थानीय अस्पताल के एक प्रवक्ता का कहना है कि शुक्रवार को 54 शव लाए गए. 66 से अधिक घायल हैं जिनमें कुछ बुरी तरह जले हुए हैं.

अचानक आई मौत

Image caption गाँव के कई लोगों के चेहरों पर राख की पर्तें देखी गईं

एक राहतकर्मी ने एएफ़पी समाचार एजेंसी से कहा, "मैंने एक बच्चे और उसके माता-पिता के शव देखे जो बिस्तर पर लेटे हुए थे. इसका मतलब जब उनके मकान पर खौलती हुई राख गिरी होगी तो वे सो रहे होंगे. मैंने एक ऐसे व्यक्ति का शव भी देखा जिसके हाथ में फ़ोन था".

एक ज्वालामुखी विशेषज्ञ का कहना था, "यह अब तक का सबसे बड़ा रिसाव था. गर्म धुएँ के बादल 13 किलोमीटर दूर तक पहुँचे और विस्फोट की आवाज़ 20 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी".

एक राहतकर्मी ने बीबीसी से कहा कि यदि स्थानीय निवासी ख़तरे के ज़ोन से दूर होते तो हताहतों की संख्या इतनी न होती.

वैज्ञानिकों ने आने वाले समय में कुछ अन्य विस्फोटों की चेतावनी दी है.

इंडोनेशिया पहले ही एक अन्य प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है जब पिछले हफ़्ते मेंतावाई द्वीप में सुनामी से 400 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हज़ारों लोगों को आपातकालीन शिविरों में जाना पड़ा था.

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