बर्मा में 20 वर्षों बाद चुनाव

बर्मा चुनाव
Image caption बर्मा के मुख्य राजनीतिक दल को चुनाव के पहले भंग कर दिया गया है.

बर्मा में आम चुनावों के लिए रविवार को मतदान शुरु हो चुका है. बर्मा में पिछले 20 वर्षों के दौरान ये पहला आम चुनाव हैं.

यहाँ करीब 50 वर्षो तक सैनिक शासन चला आ रहा है.

शासन संभाल रहे जनरलों का दावा है कि ये चुनाव देश में प्रजातांत्रिक व्यवस्था को मज़बूत करेगा लेकिन आलोचकों का मानना है कि ये महज़ एक ढोंग है.

नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची का राजनीतिक दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी, इस चुनाव का बहिष्कार कर रहा है. ये देश का मुख्य विपक्षी दल भी है.

सत्ता में मौजूद सैनिक शासकों ने आंग सान सू ची को वर्षों से क़ैद कर रखा है और उन्हें इस चुनाव में शामिल होने की इजाज़त भी नहीं दी गई है.

आंग सान सू ची के दल ने 1990 में हुए चुनाव में जीत हासिल की थी लेकिन उन्हें सरकार बनाने का अवसर नहीं दिया गया था.

मुख्य विपक्षी दल के बहिष्कार की वजह से ये माना जा रहा है कि सैनिक शासन के समर्थित उम्मीदवार आसानी से जीत हासिल कर लेंगें.

विरोधी दलों का आरोप है कि लोगों को सैनिक शासन समर्थित उम्मीदवार को वोट न देने की सूरत में नौकरी से हाथ धोने की धमकी दी गई है.

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