सू ची की रिहाई की संभावना

  • 12 नवंबर 2010
आंग सान सू ची
Image caption चुनाव बहिष्कार के कारण आंग सान सू ची के दल को भंग कर दिया गया था

बर्मा से ऐसे समाचार मिल रहे हैं कि लोकतंत्र समर्थक नेता ऑंग सान सू ची को शनिवार को रिहा किया जा सकता है. सू ची के समर्थकों ने बताया है कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि उनके नेता की रिहाई शनिवार को होगी.

सू ची पिछले 15 साल से अपने घर में नज़रबंद हैं, उनकी नज़रबंदी की अवधि शनिवार को समाप्त हो रही है, बर्मा में चुनाव ख़त्म के होने के बाद से ही उनकी रिहाई की अटकलें शुरू हो गई थीं.

सू ची बर्मा में सैनिक शासन की हिरासत में बंद 2000 से अधिक राजनीतिक बंदियों में सबसे महत्वपूर्ण हैं.

उनके समर्थक उनकी नज़रबंदी की अवधि समाप्त होने के दिन गिनते रहे हैं, इस आशा के साथ कि शायद बर्मा की सैनिक सरकार उन्हें रिहा कर दे.

बर्मा से आ रही ख़बरों के अनुसार उनकी रिहाई के काग़ज़ात पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. उनके घर के आस पास पुलिस गतिविधि बढ़ गई है.

सू ची की पार्टी लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी इन बर्मा के नेता चौ चौ सो ने पत्रकारों को बताया, "उन्हें हिरासत में रखने की अब कोई वजह नहीं है. उनकी रिहाई से ही देश में सचमुच लोकतंत्र बहाली की प्रक्रिया शुरु होगी और उसके बाद राष्ट्रीय मेल मिलाप की शुरुआत हो सकेगी".

पिछले सप्ताहांत दो दशकों के बाद बर्मा में आम चुनाव कराए गए थे जिनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर कई सवाल उठाए गए. चुनाव में वही हुआ जिसकी अपेक्षा थी. मतगणना का काम लगभग पूरा हो गया है और सेना समर्थित यूनियन ऑफ़ सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमैंट पार्टी (यूएसडीपी) ने जीत का दावा किया है.

बीस साल पहले हुए चुनाव में ऑंग सान सू ची की नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी को भारी विजय मिली थी लेकिन सेना ने उसे रद्द घोषित कर दिया था.

उसके बाद सू ची को नज़रबंद कर दिया गया जिसकी अवधि निरंतर बढ़ाई जाती रही है.

डेढ़ साल पहले एक अमरीकी नागरिक झील पार करके चुपचाप उनके घर चला आया था. सेना को बहाना मिल गया और उसने एक विदेशी को शरण देने के आरोप में सू ची की नज़रबंदी की अवधि डेढ़ साल बढ़ा दी.

डेढ़ साल की अवधि शनिवार को समाप्त हो रही है जिससे ये अटकलें गर्म हो गई हैं कि शायद सरकार उन्हे रिहा कर दे लेकिन इस बारे में किसी तरह की सरकारी घोषणा नहीं हुई है.

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