उमर बकरी मोहम्मद गिरफ़्तार

ओमर बकरी मोहम्मद
Image caption लबनान की पुलिस ने कट्टरपंथी नेता बकरी मोहम्मद को गिरफ़्तार किया

लेबनान की पुलिस ने कट्टरपंथी मुस्लिम धार्मिक नेता उमर बकरी मोहम्मद को गिरफ़्तार कर लिया है.

कुछ दिन पहले उन्हे एक सैनिक अदालत ने आजन्म कारावास का दंड सुनाया था.

उन पर लेबनान की सरकार को कमज़ोर करने के उद्देश्य से एक चरमपंथी संगठन बनाने का आरोप था और ये मुक़दमा उनकी अनुपस्थिति में चलाया गया.

उमर बकरी मोहम्मद का जन्म सीरिया में हुआ था लेकिन उनके पास लबनान की भी नागरिकता है.

उन्होने 1986 में ब्रिटेन में शरण ली और 20 साल तक यहां रहे.

लेकिन लंदन में हुए चरमपंथी हमलों के बाद उनकी टिप्पणी को लेकर प्रसार माध्यमों में तूफ़ान उठा और 2005 में वो लेबनान चले गए.

ब्रिटेन ने उनके लौटने पर ये कह कर पाबंदी लगा दी कि 'उनकी उपस्थिति आम जनता की भलाई में सहायक नहीं है'.

लेबनानी सुरक्षा अधिकारियों ने समाचार एजेंसियों को बताया कि बकरी मोहम्मद को उत्तरी शहर त्रिपली स्थित उनके निवास से गिरफ़्तार किया गया.

एक अधिकारी ने एएफ़पी समाचार एजेंसी से कहा, "उन्हे बेरुत ले जाया जा रहा है".

आतंकवादी गतिविधियां

संवाददाताओं का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रशासन ने उन्हे इससे पहले गिरफ़्तार क्यों नहीं किया.

बकरी मोहम्मद उन 54 लोगों में से एक हैं जिन्हे 2007 में लबनानी सेना के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए सज़ा सुनाई गई है.

वो एक सशस्त्र संगठन का सदस्य होने के दोषी पाए गए जिसका लक्ष्य आतंकवादी गतिविधियां करना और लेबनानी सैनिकों की हत्या करना था.

सज़ा सुनाए जाने के बाद बकरी मोहम्मद ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि वो एक दिन भी जेल में नहीं गुज़ारेंगे.

"मैं स्वयं को किसी अदालत के हवाले नहीं करूंगा. मैं न तो ब्रिटेन के क़ानून में विश्वास करता हूं और न ही लेबनान के क़ानून में".

बकरी मोहम्मद उत्तरी लंदन में 'अल-मोहाजिरून' नामक एक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन चलाते थे लेकिन 2004 में उसे भंग कर दिया गया.

जुलाई 2005 में लंदन पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद उन्होने कहा था कि अगर उन्हे इस बात की जानकारी हो कि मुसलमान इस तरह के हमलों की योजना बना रहे हैं तो वो पुलिस को कभी सूचित नहीं करेंगे.

इस टिप्पणी से ब्रिटेन वासियों को बहुत आघात पहुंचा था.

इसके कुछ समय बाद वो अपनी मां को देखने के बहाने से बेरुत चले गए लेकिन उनके पीछे से ब्रिटिश सरकार ने उनके लौटने पर पाबंदी लगा दी.

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