स्वास्थ्य और प्रसन्नता का संदेश

  • 14 नवंबर 2010
Image caption लंदन के नेहरू सेंटर में हैल्थ एंड हैप्पिनेस पत्रिका का लोकार्पण करती बैरेनस श्रीला फ़्लैदर

हर आदमी चाहता है कि वह स्वस्थ और प्रसन्न रहे और दीर्घायु हो.

लेकिन ब्रिटेन में बसे दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को मधुमेह और दिल की बीमारी का ख़तरा अधिक होता है.

शोध बताते हैं कि गोरे यूरोपीय लोगों की तुलना में उनमें मधुमेह का ख़तरा छ गुना अधिक है जबकि दिल की बीमारी से मरने का ख़तरा बाक़ी लोगों की तुलना में दोगुना है.

लेकिन लंदन स्थित भारतीय पत्रकार विजय राणा का कहना है कि जीवन शैली में परिवर्तन करके इस स्थिति को बदला जा सकता है.

इसी उद्देश्य से उन्होने हेल्थ एंड हैप्पिनेस नामकी एक पत्रिका निकाली है जिसका हाल में लंदन के नेहरू सैंटर में लोकार्पण किया गया.

ये पत्रिका पश्चिमी लंदन के कोई 10,000 घरों में मुफ़्त बांटी जाएगी जहां दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की बहुलता है.

विजय राणा ने इस पत्रिका के बारे में कहा, “ये पत्रिका शरीर और मन के सौंदर्य और सकारात्मक सोच की शक्ति को खोजने का प्रयास करेगी और स्वास्थ्य से जुड़े नवीनतम समाचार आसान भाषा और सुग्राह्य रूप में प्रस्तुत करेगी”.

Image caption ये पत्रिका लंदन के दक्षिण एशियाइयों को मुफ़्त बांटी जाएगी

नेहरू सैंटर में आयोजित कार्यक्रम में वैस्ट मिडिलसैक्स अस्पताल में हड्डियों के शल्य चिकित्सक डॉ हिलाल फ़रीद ने कहा कि अब पश्चिमी चिकित्सा प्रणाली ये स्वीकार करने लगी है कि स्वास्थ्य वर्द्धन में ‘सकारात्मक मनोविज्ञान’ और प्राचीन भारतीय ज्ञान का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है.

ब्रिटेन के एक जाने माने हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ संदीप गुप्ता ने कहा कि दक्षिण एशियाई समुदाय में 20 प्रतिशत से अधिक लोग डायबेटीज़ के शिकार हैं.

उन्होने कहा कि अच्छी सेहत का राज़ है ‘जितना कम उतना अच्छा’. यानि कम कोलैस्टरॉल, कम रक्तचाप, कम वज़न, कम वसा, कम चीनी और कम नमक सेहत के लिए अच्छा है.

हेल्थ एंड हैप्पिनेस पत्रिका ‘आजीवन’ नामक स्वयंसेवी संगठन के बैनर तले प्रकाशित की गई है जिसका गठन लंदन में रहने वाले दक्षिण एशियाई समुदाय में स्वास्थ्य का संदेश पहुंचाने के लिए किया गया है.

पत्रिका के सम्पादक विजय राणा ने कहा, “सम्पादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पत्रिका में वही लेख प्रकाशित किए जाएंगे जो वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित हों”.

उन्होने ये भी कहा कि हेल्थ एंड हैप्पिनेस पत्रिका में अप्रमाणित और अवैज्ञानिक उपचारों को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा.

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