क्यूबा में आर्थिक परिवर्तन की बयार

राउल कास्त्रो
Image caption राउल कास्त्रो ने अर्थव्यवस्था को उदार बनाने के लिए बड़े प्रस्ताव रखे हैं

राउल कास्त्रो ने जब अपने बीमार भाई फ़िदेल कास्त्रो के बदले राष्ट्रपति का पद संभाला था तब घोषणा की थी कि सरकारी नियंत्रण वाली क्यूबा की अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के लिए बड़े विचारविमर्श की ज़रुरत है.

और अब चार साल बाद उन्होंने अगले साल अप्रैल में कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस यानी राष्ट्रीय सम्मेलन की बैठक बुलाने की घोषणा की है.

चौदह साल बाद हो रहे इस सम्मेलन में 'अर्थिक मॉडल को आधुनिक बनाने के लिए कुछ मूलभूत फ़ैसले' लिए जाएँगे.

राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने 32 पेज की एक पुस्तिका प्रकाशित की है जिसका शीर्षक है, 'सामाजिक और आर्थिक नीति की मार्गदर्शिका'.

इस पुस्तिका से साफ़ संकेत मिलते हैं कि उनके दिमाग़ में किस तरह की योजना है.

बदला नज़रिया

राष्ट्रपति राउल जिस तरह के आर्थिक परिवर्तनों का प्रस्ताव कर रहे हैं चीन और वियतनाम ने पहले ही उन्हें अपना लिया है.

लेकिन वे कुछ वैचारिक मतभेदों के आगे जाने की बात करते हैं.

Image caption अभी क्यूबा की अधिकांश आर्थिक गतिविधियों पर सरकार का नियंत्रण है

उदाहरण के तौर पर 1960 के बाद पहली बार क्यूबा के लोगों को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे किसी और व्यक्ति को अपने यहाँ काम पर रख लें.

अब तक वहाँ का संविधान इस तरह से किसी को काम पर रखे जाने को शोषण मानता रहा है.

इसके अलावा सरकार अगले साल अप्रैल से क़रीब पाँच लाख लोगों की सरकारी नौकरियाँ ख़त्म करने जा रही है. अब सरकार चाहती है कि लोग या तो स्वरोज़गार करें या फिर कोई नया व्यवसाय शुरु करें.

इसके लिए उन्हें बैंकों से कर्ज़ भी दिए जाएँगे और वे कोई जगह किराए पर ले पाएँगे या हो सकता है कि उन्हें जगह ख़रीदने की अनुमति भी मिल जाए.

जब सोवियत संघ ने क्यूबा को ख़स्ता आर्थिक हालात के साथ छोड़ा था तो क्यूबा में कुछ छोटे पारिवारिक कारोबार की अनुमति दी गई थी. लेकिन उन्हें हमेशा ही बुरी नज़र से देखा जाता रहा और जैसे ही क्यूबा की आर्थिक हालत कुछ सुधरी उन पर टैक्स और लालफ़ीता शाही का शिकंजा कुछ इस तरह से कसा गया कि उनमें से ज़्यादातर कारोबार बंद ही हो गए.

लेकिन नई मार्गदर्शिका में ज़ोर देकर कहा गया है कि स्वरोज़गार कोई बुरा शब्द नहीं है और वो लोग जो अपने लिए काम करेंगे उन्हें कलंकित घोषित नहीं किया जाएगा.

अगले साल होने वाली कांग्रेस शायद आख़िरी कांग्रेस होगी जिसका नियंत्रण उस पीढ़ी के पास होगा जिसने 1959 की क्रांति में हिस्सा लिया था.

राउल कास्त्रो की व्यवहारिक नीतियों ने भले ही उनके भाई फ़िदेल कास्त्रो के यूटोपियाई आदर्शों का स्थान ले लिया हो लेकिन सच यह है कि सारे उद्योग अभी भी सरकार के नियंत्रण में ही रहेंगे.

नई प्रस्तावित नीति में भी ज़ोर देकर कहा गया है कि आर्थिक नीतियाँ केंद्रीय समिति ही तय करेगी न कि बाज़ार की ताक़तें.

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