'मौत की सज़ा के आदेश पर हस्ताक्षर नहीं'

तारिक़ अज़ीज़

इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालबानी ने कहा है कि वे सद्दाम हुसैन के करीबी सहयोगी तारिक़ अज़ीज़ की मौत की सज़ा के आदेश पर दस्तख़त नहीं करेंगे. तारिक अज़ीज़ सद्दाम हुसैन की सरकार का एक समय महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय चेहरा थे.

पिछले महीने ही इराक़ की एक अदालत ने 1980 और 90 के दशक में राजनीतिक दलों के दमन में भूमिका को लेकर उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी. माना जाता है कि राष्ट्रपति तालबानी मौत की सज़ा के खिलाफ़ हैं लेकिन अभी ये साफ़ नहीं है कि राष्ट्रपति को मौत की सज़ा पर रोक लगाने का अधिकार है भी या नहीं.

राष्ट्रपति तालबानी ने कहा है कि तारिक़ अज़ीज़ के प्रति वो पूरी सहानुभूति रखते हैं क्योंकि उनकी उम्र सत्तर साल से ज़्यादा है और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है.

फ्रांस 24 टेलीविजन से बात करते हुए उन्होंने कहा,"मैं तारिक़ अज़ीज़ की मौत की सज़ा पर दस्तख़त नहीं करुंगा. मैं किसी की भी मौत की सज़ा पर दस्तखत नहीं करुंगा क्योंकि एक सोशल डेमोक्रैट होने के नाते मैं मौत की सज़ा के खिलाफ़ हूं. मैं तारिक़ अज़ीज़ के हालात के प्रति पूरी संवेदना रखता हूं. वो एक इराक़ी ईसाई हैं और उन्हें मारा नहीं जाना चाहिए. इन्हीं सब कारणों से मैं इस सज़ा के कागज़ात पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा."

साल 2006 में सद्दाम हुसैन की मौत की सज़ा के आदेश पर दस्तखत करने से भी तालबानी ने इनकार कर दिया था. उनकी जगह सद्दाम हुसैन की फांसी के कागजात पर उनके डेप्यूटी ने हस्ताक्षर किए थे और उसके बाद ही सद्दाम को फांसी दी गई थी.

लेकिन इस वक़्त हालात बिल्कुल अलग हैं. इराक़ में नई सरकार के गठन की प्रकिया चल रही है. संविधान के मुताबिक मौत की किसी भी सज़ा पर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर अनिवार्य है.

राष्ट्रपति तालबानी को पिछले हफ्ते ही दोबारा चुना गया है और इस वक़्त आधिकारिक तौर पर उनका कोई डेप्यूटी नहीं है जो तारिक़ अजीज़ की मौत की सज़ा पर

दस्तख़त कर सके.

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