'2014 एक लक्ष्य है, ठोस तारीख नहीं'

  • 19 नवंबर 2010
Image caption 2014 के अंत तक उम्मीद है कि अफ़गान सेना देश की सुरक्षा की बागडोर संभालने की स्थिति में होगी.

लिस्बन में शुक्रवार को अफ़गानिस्तान पर नैटो की बैठक से ठीक पहले अमरीका ने कहा है कि 2014 के अंत तक फ़ौज की वापसी एक लक्ष्य है न कि एक ठोस तारीख.

अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन के प्रवक्ता ज़्योफ़ मोरेल ने कहा है कि ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2014 के अंत तक अफ़गान सेना का पूरे देश पर नियंत्रण होगा.

लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि इस बात के लिए भी तैयार रहने की ज़रूरत होगी कि हर जगह अफ़गान सेना कमान संभालने की स्थिति में न हो और अमरीका और अन्य सहयोगी देशों की सेनाओं को इस तारीख़ के बाद भी रहना पड़े.

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि वो चाहते हैं कि 2014 तक अफ़गान सेना और पुलिस देश की कमान संभाल लें.

इस लक्ष्य को अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स और विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि ये संभव जान पड़ता है.

लिस्बन में होनेवाली नैटो की बैठक में ये मामला एजेंडा पर सबसे ऊपर होगा.

Image caption क्या 2014 तक ज़िंदगी सामान्य हो पाएगी?

इस बैठक में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं और इसमें अफ़गानिस्तान से फ़ौज वापसी की योजना पर बहस होनी है.

समयसीमा

विश्लेषकों का कहना है कि नैटो एक ठोस समयसीमा को लचीला बनाए रखने की कोशिश करेगा साथ ही ये संदेश भी देना चाहेगा कि अमरीकी और नैटो फ़ौज नौ साल से चल रहे युद्ध से वापसी की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं.

अफ़गानिस्तान में हिंसा अभी भी चरम पर है और दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. तालिबान की पहुंच पहले शांत माने जानेवाले उत्तरी और पश्चिमी इलाकों में भी बढ़ी है.

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी सेनाओं की वापसी की निश्चित तारीख़ के एलान को तालिबान एक जीत की तौर पर पेश कर सकते हैं और उनका कहना है कि वो अपने फ़ौजी अभियान को तेज़ करेंगे.

तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को फ़ोन पर बताया, “हमें बिल्कुल उम्मीद नहीं है कि विदेशी सेनाएं बिना किसी दबाव के लौट जाएंगी.”

उनका कहना था, “उन्हें (विदेशी सेनाओं को) इतिहास से सबक लेना चाहिए लेकिन लगता नहीं कि वो ऐसा कर रहे हैं. वो कोई भी रणनीति अपनाएं या समयसीमा तय करें हमारे दबाव में कोई कमी नहीं आएगी.”

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार