यूरोपीय संघ करेगा आयरलैंड की मदद

यूरोपीय संघ के वित्त मंत्रियों ने रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड के आर्थिक मदद के आवेदन को मंज़ूर कर लिया है.

इस फ़ैसले की घोषणा करते हुए आयरलैंड के प्रधानमंत्री ब्रायन कावेन ने कहा कि पैकेज की रुपरेखा पर बातचीत जारी है.

इस फैसले की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा,“मैं घोषणा करता हूं कि आयरलैंड ने यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद की मांग करने का फ़ैसला किया है. यूरोपीय अधिकारियों ने आर्थिक मदद के हमारे आवेदन को स्वीकार कर लिया है. इस आर्थिक पैकेज की रुपरेखा पर यूरोपीय संघ, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय केंद्रीय बैंक के साथ हमारी बातचीत जल्द ही शुरु होगी. मैं उम्मीद करता हूं कि अगले कुछ हफ्तों में इस समझौते को अंतिम रुप दे दिया जाएगा. ”

ब्रसल्स में बीबीसी संवाददाता ने बताया है कि इस पैकेज में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय संघ की ओर से आयरलैंड को तीन साल के भीतर करीब 100 अरब डॉलर दिए जाएंगें.

यूरोपीय संघ के आर्थिक मामलों के आयुक्त ओली रेन ने कहा है कि इस फ़ैसले से मुख्यत यूरोपीय संघ के देशों को स्थिर बनाने में मदद मिलेगी.

मंदी का शिकंजा

यूरोपीय संघ की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड पर मंदी का शिकंजा पिछले तीन सालों से धीरे धीरे कसता जा रहा था.

लगभग एक हफ्ते के व्यापक मंथन के बाद आयरलैंड ने इस बात को स्वीकार किया कि देश की कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए उसे आर्थिक मदद की ज़रुरत है.

इसके बाद आयरलैंड ने आर्थिक संकट से निपटने के लिए यूरोपीय संघ और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का दरवाज़ा खटखटाने का फ़ैसला किया. यूरोपीय संघ ने आयरलैंड के इस आवेदन को स्वीकार कर लिया है.

इस आर्थिक पैकेज के दो मकसद होंगें – एक तो 25 अरब डॉलर के सरकारी घाटे की पूर्ती करना और दूसरा देश के बैंकिग क्षेत्र को मज़बूत करना.

इस आर्थिक मदद के साथ कुछ शर्तें जुड़ी होंगी. आयरलैंड को अपने बैंकों को स्थिर बनाने के लिए शर्तों का पालन करना होगा.

हालांकि प्रधानमंत्री ब्रायन कावेन बजट को मज़बूत बनाने के लिए पहले से ही कुछ कड़े कदमों का प्रस्ताव रख चुके हैं. इस प्रस्ताव के तहत खर्च में कटौती और टैक्स में वृद्धि जैसे कदम सुझाए गए हैं.

यूरोपीय देशों में संकट

यूरोपीय देशों की अपने सहयोगीयों की मदद करने की तत्परता इस बात को दर्शाती है कि वे यूरो और यूरोपीय संघ की स्थिरता को लेकर चिंतित हैं.

आयरलैंड में बैंकिग क्षेत्र के पतन और निरंतर मंदी के दौर को देखते हुए साफ़ कहा जा सकता था कि उसे अपनी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए एक मोटे आर्थिक पैकेज की ज़रुरत है.

पिछले कुछ सालों में आयरलैंड का आर्थिक विकास प्रॉपर्टी बाज़ार के बूते पर ही हो रहा था, लेकिन 2008 से इस क्षेत्र में भारी नुकसान देखा जा रहा है. मकानों की कीमत में 50 से 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और डूबे हुए कर्ज़ में बढ़त होने लगी है.

इसका सीधा असर वहां के मुख्य बैंकों पर पड़ा और ऐसी स्थिति में बैंकों को सरकार के आगे हाथ फैलाने पड़े. परिणामस्वरुप देश की सरकार को यूरोपीय संघ से मदद की गुहार लगानी पड़ी.

जैसे जैसे आयरलैंड की अर्थव्यवस्था ढीली पड़नी शुरु हुई, वैसे वैसे बेरोज़गारी की दर में भी बढ़ोतरी होती चली गई.एक के बाद एक यूरोपीय देश आर्थिक मंदी की चपेट में आ रहे हैं. गत मई में ग्रीस को 145 अरब डॉलर का कर्ज़ लेना पड़ा था.

अपने एक आकलन में आईएमएफ ने स्पेन को चेतावनी दी थी कि उसे सख़्त आर्थिक चुनौतियों से जूझना होगा.आशंका जताई जा रही है कि आर्थिक संकट से घिरे देशों की इस सूची में पुर्तगाल अगला यूरोपीय देश होगा.

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