दो चुनाव अधिकारी निलंबित

  • 24 नवंबर 2010

अफ़ग़ानिस्तान में सितंबर में हुए संसदीय चुनाव के अंतिम नतीजे घोषित किए जाने से कुछ घंटे पहले वहाँ के दो वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है.

ये स्पष्ट नहीं है कि अटॉर्नी जनरल ने स्वतंत्र चुनाव आयोग (आईईसी) और चुनावी शिकायत आयोग ( ईसीसी) के प्रवक्ता को क्यों हटाया.

कहा जा रहा है कि नूर मोहम्मद नूर (आईईसी) और अहमद ज़िया रिफ़्त (ईसीसी) से जुड़े कागज़ात बुधवार को जज के सामने पेश किए जाएँगे.

संसदीय चुनाव भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा रहा है और अब ये ताज़ा मामला सामने आया है.

चुनाव अधिकारी पहले ही करीब 13 लाख वोटों को अवैध करार दे चुके हैं यानी कुल पड़े मतों का एक चौथाई हिस्सा.

अधिकारियों ने 10 उम्मीदवारों के नाम बाहर कर दिए हैं जिन्हें शुरुआती नतीजों में विजेता घोषित किया गया था.

इसके बाद काबुल और अन्य शहरों में कई जगह रैलियाँ हुई थीं. लोगों की माँग थी कि चुनाव आयोगों को ख़त्म कर दिया जाए.

धाँधली के आरोप

कई उम्मीदवारों ने शिकायत थी कि उनके रसूख़दार प्रतिदंद्वियों ने धाँधली की है.

अफ़ग़ानिस्तान के निचले सदन की 249 सीटों के लिए हुए चुनाव में धाँधली के आरोपों की ईसीसी जाँच कर रहा है.ईसीसी यानी इलेक्टोरल कॉम्पलेंट्स कमीशन को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन मिला है.

संवाददाताओं का कहना है कि चुनाव अधिकारियों और अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई के बीच तनाव लगातार बढ़ता रहा है.

करज़ई का दावा है कि चुनाव आयोग राजनीतिक स्थायित्व को बिगाड़ रहे हैं जबकि करज़ई पर आरोप है कि वे आयोग के कामकाज में दखल देते हैं.

पिछले साल सितंबर में हुए संसदीय चुनाव में हामिद करज़ई को दोबारा राष्ट्रपति चुना गया था लेकिन इसमें धाँधली के आरोप लगे थे और आयोग ने करज़ई को मिले एक तिहाई वोट को अवैध करार दिया था.

पिछले नौ सालों में अफ़ग़ानिस्तान के दूसरे संसदीय चुनाव में 40 फ़ीसदी लोगों ने हिस्सा लिया था

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार