आयरलैंड में चुनाव की घोषणा

रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड के प्रधानमंत्री ब्रायन कावेन ने घोषणा की है कि यूरोपीय संघ से मिलने वाली आर्थिक मदद की रूपरेखा तय होने के बाद वे नए साल में चुनाव करवाएँगे.

उन्होंने कहा कि उससे पहले सरकार बजट में कटौती का प्रस्ताव पारित करेगी. उन्होंने मध्यावधि चुनाव करवाने से मना कर दिया और कहा कि बजट का पारित होना ज़्यादा ज़रूरी है.

चुनाव की घोषणा आयरलैंड में सोमवार को चली भारी उठापटक के बाद की गई है.सरकार के सहयोगी दल ग्रीन पार्टी ने माँग की थी कि सरकार जनवरी में चुनाव कराए.

आयरलैंड में चल रहे आर्थिक संकट को देखते हुए सरकार ने रविवार को यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद की गुहार लगाई थी जिसे संघ के वित्त मंत्रियों ने मंज़ूर कर लिया था.

इसके बदले में सरकार को बुधवार को चार वर्षीय आर्थिक योजना जारी करनी होगी और बजट में बड़े स्तर पर कटौती की तैयारी करनी होगी. इसकी घोषणा सात दिसंबर को होनी है.इस घोषणा के बाद से ही लेबर समेत मुख्य विपक्षी पार्टियाँ संसद को तुरंत भंग करने की माँग करने लगी थीं.

प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपील की है कि वो बजट और चार वर्षीय योजना का समर्थन करें ताकि देश में स्थायित्व आ सके.

राजनीतिक संकट

बीबीसी संवाददाता मार्क सिम्पसन का कहना है कि इस अपील के बावजूद बजट पर सहमति से पहले ही सांसद प्रधानमंत्री कावेन को हटा सकते हैं.

नए साल में चुनाव करने की घोषणा आयरलैंड की राजनीति में दिन भर चली गहमागहमी के बाद आई है.

डबलिन में कई जगह हिंसक प्रदर्शन हुए जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सरकारी इमारतों से हटाया.

अगले महीने आने वाले बजट में 4.5 अरब यूरो की कटौती की घोषणा होगी जबकि 1.5 अरब यूरो जुटाने के लिए या तो नए कर लगाए जाएँगे या पुराने कर बढ़ाए जाएँगे.

सोमवार को सरकार की मुश्किलें और बढ़ गईं. सरकार की मदद करने वाले दो निर्दिलय सांसदों ने ये कह दिया कि वे बजट को समर्थन देने का आश्वासन तब तक नहीं दे सकते जब तक कि बजट तैयार करने में विपक्ष को भी भूमिका दी जाए.

अगर ग्रीन पार्टी सरकार को समर्थन देती भी है तो भी गठबंधन के पास केवल तीन सीटों से बहुमत है और उनमें से एक सीट पर गुरुवार को उपचुनाव होना है.

ग्रीन पार्टी के नेता जॉन गॉर्मले ने ये नहीं कहा है कि दल सरकार से अलग हो रहा है पर उन्होंने कई सारी माँगे रखी हैं और कहा है कि आम चुनाव जनवरी में होना चाहिए.

चुनाव की माँग के बाद यूरोप में बाज़ार में गिरावट देखी गई. जबकि आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद बाज़ार में उछाल देखा गया था. यूरोपीय संघ के इस पैकेज की रूपरेखा अभी तय होनी है.

इसमें ब्रिटेन करीब आठ अरब यूरो देगा. आयरलैंड में ये संकट आर्थिक मंदी और बैंक प्रणाली के चरमराने के कारण आया है.

कुछ समय पहले तक आयरलैंड में तेज़ी से आर्थिक विकास हो रहा था. कॉरपोरेट कर की कम दरों से इसमें मदद मिल रही थी.

लेकिन यहाँ के प्रॉपर्टी बाज़ार में आए संकट के बाद बैंकों पर कर्ज़ का बोझ बढ़ गया और संकट के बादल गहरा गए.

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