'तालिबान की ताकत और हिंसा में बढ़ोतरी'

अमरीका में सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथियों की ताकत बढ़ रही है और हिंसा नए स्तर पर पहुँच गई है.

कांग्रेस को दी एक रिपोर्ट में रक्षा मामलों के विशेषज्ञों ने कहा है कि 2007 के बाद से झड़पें तीन गुना बढ़ी हैं जबकि विद्रोही नई स्थितियों में बेहतर तरीके से ढल पा रहे हैं और आधुनिक भी हो रहे हैं.

टीकाकारों के मुताबिक तालिबान को ईरान से लगातार समर्थन मिल रहा है और पाकिस्तानी सीमा से सटे अफ़ग़ान इलाक़े चरमपंथियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के ख़िलाफ़ सीमित सफलता मिली है और वहाँ का विवाद सुलझाने में प्रगति का स्तर असमान रहा है.

कांग्रेस को साल में दो बार सौंपे जाने वाली रिपोर्ट में पेंटागन का कहना है कि पाकिस्तानी सेना के साथ नैटो के सहयोग में सुधार हुआ है.

हटेंगे नैटो सैनिक

हालांकि पेंटागन ने आगाह किया है कि तालिबान इस धारणा का फ़ायदा उठा रहा है कि नैटो जल्द ही अपने सैनिक हटा लेगा. कनाडा 2011 में सैनिक हटाएगा. बराक ओबामा ने भी कहा है कि अमरीका जुलाई 2011 में सैनिक हटाना शुरु करेगा.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक एक अप्रैल से तीस सितंबर के बीच अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा सबसे ज़्यादा स्तर पर थी.

पेंटागन ने कहा है कि विद्रोहियों की काबीलियत कम करने (जैसे ईरान और पाकिस्तान से मिलने वाली मदद) की कोशिशों का उचित परिणाम नहीं मिला है.

रिपोर्ट के अनुसार कई जगह स्थानीय लोग विद्रोहियों का विरोध करने लगे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में करीब 97 हज़ार अमरीकी सैनिक हैं और अन्य देशों के 48, 800 सैनिक हैं.

जनवरी 2009 में ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने अधिकारियों की संख्या तीन गुना बढ़ा कर 1100 कर दी है जिसमें कूटनयिक, जाँचकर्ता और कृषि विशेषज्ञ शामिल है.

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