बान की मून ने गोलीबारी की निंदा की

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने दक्षिण कोरिया के एक द्वीप पर उत्तर कोरिया की गोलीबारी की निंदा की है. उन्होंने इलाक़े में बढ़ते तनाव पर चिंता भी जताई.

बान की मून ने कहा है कि 1953 में कोरियाई युद्ध के बाद ये हमला सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है. उन्होंने एक फ़ोन कॉल में सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष ब्रिटेन के मार्क ग्रांट को अपनी चिंता से अवगत कराया है.

सुरक्षा परिषद के सदस्य इस बात पर विचार कर रहे हैं कि दो दक्षिण कोरियाई मरीन के मारे जाने के बाद क्या आपात बैठक बुलाई जाए.

ब्रितानी राजदूत ने रिपोर्टरों को बताया कि वे सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क में है कि आगे क्या करना चाहिए. अभी तक किसी देश ने आपात बैठक की माँग नहीं की है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के राजदूत का कहना है कि ये मामला दोनों पड़ोसियों को ही सुलझाना होगा न कि यूएन को.

इस बीच दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली मयूंग-बाक ने 'और उकसाए जाने पर' अपनी सेना को उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ मिसाइल के ज़रिए जवाबी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं.

राष्ट्रपति ली मयूंग-बाक का ये बयान कोरियाई प्रायद्वीप में भीषण तनाव की स्थिति पैदा होने के बाद आया है. ये गंभीर स्थिति तब पैदा हुई जब उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के एक द्वीप पर तोपों से हमला किया. उसके बाद दक्षिण कोरिया ने 'हाई एलर्ट' घोषित किया है.

दोनों देशों के बीच एक घंटे तक चले गोलीबारी में कई गोले दक्षिण कोरिया के एक द्वीप पर गिरे जिसमें दो सैनिक मारे गए और क़रीब 50 लोग घायल हो गए. घायलों में सैनिक और स्थानीय लोग सभी शामिल हैं.

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर पहले गोलीबारी करने का आरोप लगाया है.

दक्षिण कोरिया का कहना है कि वो अपने द्वीप पर गोलीबारी का अभ्यास कर रहा था और उसने उत्तर कोरिया की ओर पहले कोई फ़ायरिंग नहीं की है.

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सेयोल में स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले 50 सालों में दोनों देशों की बीच हुई ये अब तक की सबसे गंभीर कार्रवाई है.

गोलाबारी की तस्वीरें देखें

दो सौ गोले दागे

दक्षिण कोरिया ने कहा था कि उत्तर कोरिया की सेना ने अपनी विवादित पश्चिमी सीमा पर स्थित टापुओं में से एक पर तोपों से लगभग 200 गोले दागे.

दक्षिण कोरिया के मुताबिक कई सैनिक और नागरिक घायल हुए हैं, दो लोग मारे गए हैं और अनेक घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. योंग्पेयोंग टापू से प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि कई जगहों से धुँआ उठता नज़र आ रहा है.

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दक्षिण कोरिया की सेना का कहना है कि वह जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है और लड़ाकू विमानों को तैयार किया जा रहा है.

तोपों के गोले एक सैन्य अड्डे पर गिरे और इसके जवाब में दक्षिण कोरिया ने 80 गोले दागे. कुछ देर के बाद ये गोलाबारी बंद हो गई.

लेकिन इस गोलाबारी ने वित्तीय बाज़ारों को बड़ा झटका दिया है. दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के चेतावनी जारी की है.

जिस टापू को निशाना बनाया गया वहाँ पर अभी कई जगहों पर भीषण आग लगी हुई है. सैनिकों और नागरिकों ने बंकरों में शरण ले ली है और नागरिकों को वहाँ से बाहर भी निकाला जा रहा है.

छह देशों की वार्ता से इनकार

ग़ौरतलब है कि ये घटना उस समय हुई है जब उत्तर कोरिया के लिए अमरीका के विशेष दूत स्टीफ़न बॉसवर्थ ने कहा है कि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर छिड़े ताज़ा विवाद के बाद छह देशों की बातचीत दोबारा शुरु नहीं हो सकती है.

पिछले हफ़्ते अमरीकी वैज्ञानिक स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय के सिगफ्राइड हैकर की उत्तर कोरिया यात्रा के दौरान उन्होंने पाया था कि उत्तर कोरिया के पास यूरेनियम संवर्द्धन के अनेक सेट्रीफ़्यूज हैं और चाहे ये असैनिक इस्तेमाल के लिए हैं लेकिन इनमें बदलाव लाकर इन्हें हथियारों में इस्तेमाल होने वाला यूरेनियम बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

हाल में इस विवाद के छिड़ने के बाद अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा था कि उत्तर कोरिया का तथाकथित यूरेनियम संवर्द्धन संयंत्र उसकी परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को बढ़ा सकता है.

इससे पहले अमरीका के शीर्ष सैन्य अधिकारी एडमिरल माइक मुलेन ने कहा था कि उत्तर कोरिया पूरे पूर्वी एशिया को अस्थायी करने की राह पर है. माइक मुलेन का कहना था कि ये सबूत है कि उत्तर कोरिया अपने 'आक्रामक रुख़' पर कायम है.

उनका कहना था कि पिछले हफ़्ते अमरीकी वैज्ञानिक स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय के सिगफ्राइड हैकर की उत्तर कोरिया यात्रा सिद्ध करती है कि उत्तर कोरिया को लेकर अमरीका की चिंताएं जायज़ हैं.

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