रूसी संसद में स्टालिन की आलोचना

स्टालिन
Image caption स्टालिन को कटिन नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है

रूस में संसद के निचले सदन ड्यूमा ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान कटिन में पोलैंड के हज़ारों अधिकारियों की हत्या के लिए जोसेफ़ स्टालिन को ज़िम्मेदार ठहराया है.

ड्यूमा में रूसी राजनेताओं ने यह घोषणा की है कि स्टालिन और अन्य सोवियत अधिकारियों ने वर्ष 1940 में हुए इस नरसंहार का आदेश दिया था.

रूसी राजनेताओं का ये बयान ऐसे समय आया है जब एक सप्ताह बाद ही रूसी राष्ट्रपति पोलैंड की यात्रा पर जा रहे हैं. पोलैंड ने इस बयान का स्वागत किया है.

ड्यूमा में इस मुद्दे पर हुई ज़ोरदार बहस में कम्युनिस्ट सांसदों ने इस घोषणा का जम कर विरोध किया और कुछ सांसद को इस मामले में सोवियत संघ की ज़िम्मेदारी भी नहीं मान रहे थे.

उम्मीद

दशकों तक सोवियत संघ की ओर से यही बात कही जाती रही थी कि कटिन नरसंहार के पीछे नाज़ियों का हाथ था. वर्ष 1941 में सोवियत संघ पर हमला करने के बाद कटिन पर नाज़ियों का शासन रहा.

वर्ष 1990 में पहली बार इस सच को स्वीकार किया गया. उस समय सोवियत संघ की शक्ति ढलान पर थी. लेकिन हमेशा ही इस मुद्दे की छाया रूस और पोलैंड के रिश्तों पर रही.

ड्यूमा ने इस प्रस्ताव को पारित करने के साथ ये उम्मीद जताई कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित रूस और पोलैंड के रिश्तों में नई शुरुआत होगी.

पोलैंड की संसद के निचले सदन के स्पीकर ग्रज़ेगॉर्ज़ सेटिना ने ड्यूमा की घोषणा को एक अहम क़दम बताया है.

कटिन नरसंहार के लिए किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया क्योंकि रूसी वकीलों का ये तर्क था कि इसके लिए ज़िम्मेदार लोग अब इस दुनिया में नहीं रहे.

वर्ष 2005 में रूस की एक न्यायिक जाँच में 1803 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई थी. जबकि कटिन और सोवियत संघ के अन्य स्थानों पर मारे गए पोलैंड के क़ैदियों की संख्या 22 हज़ार के पास थी. जिनमें क़रीब आठ हज़ार सैनिक अधिकारी थे.

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