'धमाके की साज़िश' में गिरफ़्तारी

मोहम्मद उस्मान मोहम्मद
Image caption पुलिस ने मोहम्मद उस्मान मोहम्मद की ये तस्वीर जारी की है.

अमरीका के ओरेगन राज्य में क्रिसमस के दौरान कथित तौर पर एक बम धमाका करने की साज़िश रचने के आरोप में एक युवक को गिरफ़्तार किया गया है.

सोमालिया में पैदा हुए 19 वर्ष के मोहम्मद उस्मान मोहम्मद को इस आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.

उन्हें तब गिरफ़्तार किया गया जब उन्होंने एक ऐसा फ़ोन मिलाया जिसके बारे में उन्हें अंदाज़ा था कि इस फ़ोन के बजने से धमाका हो जाएगा.

लेकिन ये धमाका नहीं हुआ क्योंकि जिस बम में धमाका करना था वो नकली था और उसे स्टिंग ऑपरेशन करने वालों ने दिया था.

मोहम्मद अब अमरीका के नागरिक हैं और वो कथित तौर पर उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में अपने एक सहयोगी के संपर्क में थे.

मोहम्मद ने एक समारोह में क्रिसमस ट्री को रौशन किए जाने के दौरान ये धमाका करने का प्रयास किया.

मोहम्मद समारोह स्थल में एक गाड़ी चला कर ले गए थे. उन्हें शुक्रवार को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

अधिकारियों का कहना है कि मोहम्मद ने ज़ोर से ''अल्लाहो-अक़बर'' का नारा लगाया और उन अधिकारियों को हटाने की कोशिश की जो उनकी ओर बढ़ रहे थे.

कोर्ट में दाख़िल दस्तावेज़ बताते हैं कि इस मामले की शुरूआत 2009 के अगस्त में हुई थी.

मोहम्मद और उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में रहनेवाले उनके सहयोगी के बीच ईमेल के आदान प्रदान के साक्ष्य मौजूद हैं.

बड़ी थी साज़िश

अमरीका के ख़ुफ़िया विभाग के विशेष एजेंट ऑर्थर बालिज़ान का ने कहा, ''ख़तरा यथार्थ के बहुत ही क़रीब था. हमारी जाँच से पता चला है कि मोहम्मद बहुत ही बड़े स्तर पर धमाका करने के प्रति पूरी तरह से समर्पित था. मैं लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हम मोड़ पर असल में धमाका कर पाने का हमने उसे कोई भी मौका नहीं दिया.''

'द ओरेगॉनियन' अख़बार ने ओरेगन के अटॉर्नी ड्वाइट होल्टन के हवाले से लिखा है कि ''इस व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति को देखकर ये सोचना पड़ता है कि यहाँ, ओरेगन में भी ऐसे लोग हैं जो अमरीकियों को मार डालने का निश्चय किए हुए हैं. लेकिन अब उससे कोई ख़तरा नहीं है.''

कोर्ट में दाख़िल किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि एफ़बीआई के एक एजेंट ने अपनी पहचान छुपाकर मोहम्मद से संपर्क किया और ख़ुद को पाकिस्तान के एक चरमपंथी सहयोगी का आदमी बताकर धमाके करने की रणनीति पर चर्चा की.

एजेंट का कहना था कि मोहम्मद से जब ये कहा गया कि समारोह में कई बच्चे भी होंगे तो कथित तौर पर मोहम्मद ने कहा कि वो ऐसे मौके की तलाश में है ''जहाँ काफ़ी भीड़ हो और परिवारों के साथ छुट्टियाँ बिता रहे लोगों पर उस मस्ती के दौरान हमले किए जाएँ.''

मोहम्मद ने कथित तौर पर एफ़बीआई एजेंट को बताया कि वो काफ़िरों यानी नास्तिकों के ख़िलाफ़ 'जिहाद' करने की बात तब से सोचते थे जबसे वो 15 वर्ष के थे.

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