'दुनिया:पराकाष्ठाएँ' - ईश्वर

'दुनिया:पराकाष्ठाएँ' श्रृंखला के अंतिम भाग में जून 2011 में लोगों के जीवन में धर्म के महत्व की पड़ताल की जाएगी.

गैलप के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि दुनियाभर में करीब 84 प्रतिशत वयस्क अभी भी धर्म को जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग मानते हैं. चार सालों में इस विचार में कोई परिवर्तन नहीं हुए हैं.

वर्ष 2009 में 114 देशों में यह सर्वेक्षण करवाया गया था. दस देशों में - जिनमें बांग्लादेश, नियेर, यमन और इंडोनेशिया शामिल हैं - कम से कम 98 प्रतिशत लोगों ने माना कि धर्म उनके जीवन में महत्वपूर्ण है.

ज़्यादातर धार्मिक देश तुलनात्मक रूप से ग़रीब हैं और वहाँ प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 5000 डॉलर से कम है. इसके विपरीत जिन देशों के प्रति व्यक्ति घरेलू उत्पाद का स्तर ऊँचा है, वहाँ केवल 47 प्रतिशत लोगों का मानना है कि धर्म उनके जीवन में महत्वपूर्ण है.

सबसे कम धार्मिक देशों में एस्टोनिया (16 प्रतिशत), स्वीडन (17 प्रतिशत) और डेनमार्क (19 प्रतशित) हैं.

चार में से तीन ऐसे देश जो कम आय वाले देशों में शामिल हैं और जो कम धार्मिक हैं - पूर्व सोवियत संघ के सदस्य रहे हैं. वहाँ वर्ष 1991 तक धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक थी.

उच्च-आय वाले देशों में भी विश्वास करने वालों में काफ़ी अंतर दिखता है. अमरीका में यूरोपीय लोगों के मुकाबले धर्म पर ज़्यादा ज़ोर है. यूरोप में चर्च जाने वालों की संख्या में कमी आई है.

अमरीका में रोज़मर्रा की ज़िंदगी में धर्म का महत्व विभिन्न जगहों पर अलग-अलग है. मिसीसिप्पी के निवासी ख़ुद को सबसे ज़्यादा धार्मिक मानते हैं और 82 प्रतिशत लोग कहते हैं धर्म उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है. लेकिन न्यू हैम्पशायर में केवल 36 प्रतिशत धर्म को महत्व देते हैं.

ईसाई धर्म (जिसमें कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट शामिल हैं) अब भी दुनिया में सबसे बड़ा धर्म होने का दावा करता है. दुनियाभर में उसके 32 प्रतिशत यानी 2.1 अरब अनुयायी हैं. दुनिया में 23 प्रतिशत यानी लगभग 1.6 अरब लोग इस्लाम धर्म का अनुसरण करते हैं.