'दुनिया:पराकाष्ठाएँ' - प्रदूषण

'दुनिया:पराकाष्ठाएँ' श्रृंखला के आठवें अंक में पर्यावरण पर ध्यान दिया जा रहा है.

हाल के वर्षों में दुनिया भर के राजनीतिक नेताओं ने प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर अपना ध्यान देना शुरू किया है.

संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम की एक नए रिपोर्ट के मुताबिक पृथ्वी के बढ़ रहे तापमान को रोकने के लिए ज़रूरी कार्रवाई के बारे में विज्ञान जो कहता है और सरकारों ने जो करने की ठानी है, उसमें काफी अंतर है.

वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से कार्बन उत्सर्जन में गिरावट आई है लेकिन यह वर्ष 2009 में 1.3 प्रतिशत की कमी ही थी. पर्यावरण कार्यक्रम ने आगाह किया है कि जैसे ही अर्थव्यस्था में उछाल आएगा फ़िर से कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोतरी होगी.

इंटरनेशल एनर्जी अथॉरिटी के आंकड़ों के मुताबिक अमरीका और चीन कार्बन उत्सर्जन के मामले में सबसे आगे हैं जो क्रमश: 56 और 65 लाख टन है. कम विकसित अफ़्रीकी देश जैसे कॉंगो, सेनेगल और कुछ पूर्वी यूरोपीय देशों में कार्बन उत्सर्जन नहीं है या नहीं के बराबर है

हालांकि प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन से नई कहानी सामने आती है. कई मध्य पूर्वी देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन काफी़ ज़्यादा है. क़तर 42.09 टन प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के साथ सबसे आगे है.

ट्रिनिडाड और टोबागो पाँचवे स्थान पर है जहाँ प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 28.4 टन है. बिजली की पैदावार में बढ़ोतरी और उद्योग जगत के कारण हाल के वर्षों में कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि हुई है.

आईस्लैंड अक्षय ऊर्जा के स्रोतों का इस्तेमाल करने में दुनिया में सबसे आगे है. हालांकि प्रति व्यक्ति सबसे अधिक तेल की खपत के मामले में आईस्लैंड क़तर से पीछे है लेकिन वह इस मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है.