'सोमालिया को भूल गई है दुनिया'

  • 30 नवंबर 2010
सोमालिया
Image caption 71 फ़ीसदी लोगों ने माना कि अल-शबाब का होना उनके लिए बुरा हैं और वो अल-शबाब को सत्ता में नहीं देखना चाहते.

बीबीसी की ओर से सोमालिया की राजधानी मोगादीशू में कराए गए एक जनमत सर्वेक्षण में ये सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोग ये मानते हैं कि दुनिया सोमालिया को पूरी तरह से भूल गई है.

शहर के 92 फ़ीसदी परिवारों ने माना है कि वो अपनी बुनियादी ज़रूरतों को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं.

ये सर्वेक्षण मोगादीशू के लगभग सभी ज़िलों में लोगों के बीच कराया गया.

इसमें उन इलाकों के लोग भी शामिल थे जो इस्लामी चरमपंथी संगठन अल-शबाब के नियंत्रण में हैं.

अल-शबाब से असंतुष्ट

सर्वेक्षण के दौरान 71 फ़ीसदी लोगों ने माना कि अल-शबाब की उपस्थिति उनके लिए ठीक नहीं है और वो अल-शबाब को सत्ता में नहीं देखना चाहते.

सर्वेक्षण में शामिल आधे से ज़्यादा लोगों का मानना है कि मोगादीशू को नियंत्रित कर रहे अफ्रीकी संघ की शांति सेना सोमालिया में कई साल से जारी संघर्ष को खत्म कर सकती है.

सोमालिया में पिछले 20 सालों से कोई सरकार नहीं है और स्थानीय विद्रोही गुटों के बीच संघर्ष जारी है.

जानकारों का मानना है कि सोमालिया जैसे संकटग्रस्त और ख़तरनाक इलाक़े में जनमत संग्रह के ये नतीजे सच्चाई के बेहद क़रीब हो सकते हैं.

सर्वेक्षण में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की राय शामिल करने के लिए मतदान सर्वेक्षक बंदूकों की परवाह न करते हुए उन इलाकों में भी गए जहाँ चरमपंथियों का नियंत्रण है.

ये जानते हुए कि अल-शबाब को सीधे तौर पर विरोधी कहना ख़तरनाक है सर्वेक्षकों ने इस संगठन को विपक्ष के तौर पर संबोधित किया.

अराजकता का दौर

मतदान में स्पष्ट रूप से ये बात सामने आई है कि सोमालिया के लोगों में शांति बहाल होने की भारी उम्मीद है हालांकि उन्हें ये डर भी है कि ये शांति बहाली कम समय के लिए न हो.

72 फ़ीसदी लोगों ने खुले तौर पर माना कि वो अल-शबाब को सत्ता में नहीं देखना चाहते.

सर्वेक्षण में शामिल 57 फ़ीसदी घर कैंपों में बसे हैं. ये लोग प्लास्टिक और टिन की छतों के नीचे गुज़र कर रहे हैं. इनमें से 41 फ़ीसदी लोग अशिक्षित थे.

मुस्लिम बहुल अफ़्रीकी देश सोमालिया में वर्षों से कोई स्थाई सरकार नहीं है और अमरीका को लगता है कि अल-क़ायदा जैसे संगठन इसे अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.

दिसंबर 2006 में अमरीकी मदद से इथियोपिया की सेना ने राजधानी मोगादीशू से वहाँ के इस्लामिक कोर्ट्स आंदोलन को उखाड़ फेंका था.

इसके बाद सोमालिया में अराजकता का एक नया दौर शुरू हो गया, दक्षिणी सोमालिया स्थानीय क़बीलों की राजनीति में फंस गया और कई इलाक़े इस्लामी चरमपंथियों के नियंत्रण में चले गए.

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