2जी मामले पर राष्ट्रपति से गुहार

  • 30 नवंबर 2010
प्रतिभा देवी सिंह पाटिल
Image caption टू-जी घोटाले की जांच की मांग दोहराते हुए विपक्ष ने लगातार 13वें दिन भी संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी.

2जी स्पैक्ट्रम आवंटन में कथित घोटाले को लेकर संसद में जारी विपक्ष का गतिरोध मंगलवार को सड़क तक पहुँच गया.

एआईएडीएमके, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और वाम दलों सहित कई दलों ने संसद के सामने प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति से मुलाकात की.

इन दलों के 80 से ज़्यादा सांसदों ने जेपीसी को लेकर अपनी मांग दोहराते हुए संसद से राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया और राष्ट्रपति से मुलाक़ात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा.

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, ''2जी घोटाला आज़ादी के बाद से अब तक का सबसे बड़ा मामला है. हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वो इस मामले की जांच जेपीसी से कराने के लिए सरकार पर उचित दबाव बनाएं.''

व्यवस्था में हेरफेर

उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति ने सभी 10 दलों के नेताओं की बात सुनी और जेपीसी पर हमारे ज्ञापन को स्वीकार किया. अब ये उन पर निर्भर करता है कि वो इस मामले में क्या फ़ैसला लेती हैं.''

येचुरी ने कहा, "जेपीसी की जांच का मक़सद केवल दोषियों की पड़ताल और उन्हें सज़ा देना नहीं बल्कि ये जानना भी है कि सरकारी व्यवस्था में किस हद तक हेरफेर किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि संवैधानिक रुप से सरकार की कमान राष्ट्रपति के हाथ में होती है और यही वजह है इन नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाक़ात की है.

विपक्ष ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से टू-जी घोटाले की जांच की मांग दोहराते हुए लगातार 13वें दिन भी संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी थी.

सोमवार को भी विपक्ष के गतिरोध के चलते संसद के दोनों सदनों को स्थगित करना पड़ा था.

इस स्थिति से निपटने के लिए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी लेकिन उसमें भी कोई हल नहीं निकल सका.

संबंधित समाचार