पाक के ख़िलाफ़ भारत की इच्छाशक्ति पर सवाल

  • 1 दिसंबर 2010
पृथ्वी मिसाईल
Image caption अमरीका ने भारत की 'आकस्मिक सैन्य योजना' पर सवाल उठाए हैं.

विकीलीक्स जिन गोपनीय अमरीकी दस्तावेज़ों को सामने लेकर आया है उनमें एक में भारत में अमरीकी दूतावास का भारत की आकस्मिक सैन्य योजना का आकलन भी शामिल है.

सामने आए दस्तावेज़ के अनुसार आपात स्थिति में 'कोल्ड स्टार्ट' नाम की तथाकथित भारतीय सामरिक नीति कारगर है या नहीं इसपर अमरीकी सोच के संकेत मिलते हैं.

अमरीका ने एक दस्तावेज़ में इस बात पर शक ज़ाहिर किया है कि भारतीय सेना कभी 'कोल्ड स्टार्ट' जैसी सामरिक नीति पर अमल कर सकती है.

विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए दस्तावेज़ में कहा गया है,"ये दूतावास की सामूहिक सोच है कि भारत को मिले-जुले परिणाम मिल सकते हैं. भारतीय सेना शुरुआती सफलताओं को बरक़रार रख पाने में दिक्कतों का सामना कर सकती है."

अमरीकी आकलन के अनुसार भारतीय नेतृत्व को इस बात का अहसास है कि 'कोल्ड स्टार्ट' का ध्येय बिना परमाणु हथियारों के पाकिस्तान के विरुद्ध सीमित कार्रवाई करना है लेकिन उन्हें ये यक़ीन नहीं है पाकिस्तान इसके जवाब में परमाणु हथियारों का प्रयोग नहीं करेगा.

विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए दस्तावेज़ में दिल्ली में अमरीका के राजदूत टिमोथी रोमर के अनुसार मुंबई में हुआ चरमपंथी हमला भारत की 'कोल्ड स्टार्ट' नामक सामरिक नीति पर रोशनी डालता है.

उनके अनुसार, "पहले तो मुंबई जैसे दुस्साहसी हमले के बावजूद कोल्ड स्टार्ट को लागू नहीं किया गया. इससे 'कोल्ड स्टार्ट' को लागू करने में भारत सरकार की इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है. दूसरे पाकिस्तान को वर्ष 2004 से भारत की 'कोल्ड स्टार्ट' रणनीति के बारे में पता है लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान ने भारत पर चरमपंथी हमला रोकने के लिए कुछ नहीं किया. ये तथ्य 'कोल्ड स्टार्ट' के असर पर सवाल उठाता है. भले ही भारतीय सेना इस सामरिक नीति के लिए प्रतिबद्ध हो लेकिन कोल्ड स्टार्ट के लिए राजनीतिक सहयोग उतना साफ़ नहीं है."

अमरीकी दस्तावेजों में ये भी कहा गया है कि कई भारतीय उच्चाधिकारी कोल्ड स्टार्ट के पक्षधर नहीं है, इनमें से एक भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन भी हैं.

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