मुशर्रफ़ और मनमोहन थे 'समझौते के बहुत क़रीब'

मुशर्रफ़
Image caption मुशर्रफ़ ने अब एक नई राजनीतिक पार्टी शुरू की है.

विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए दस्तावेज़ों के मुताबिक वर्ष 2007 में मुशर्रफ़ ने अमरीकी अधिकारियों को बताया था कि वो मनमोहन सिंह के साथ कश्मीर पर एक समझौते के बहुत क़रीब हैं.

अमरीका की प्रतिनिधि सभा की पूर्व अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के साथ आए प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान जब प्रतिनिधि सभा के विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष टॉम लैंटॉस ने मुशर्रफ़ से पूछा कि भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते की क्या स्थिति है तब अपनी काफ़ी आशावादी प्रतिक्रिया में मुशर्रफ़ ने कहा कि उन्हें काफ़ी उम्मीदें हैं.

विकीलीक्स ने जिन दस्तावेज़ों को उजागर किया है उनके अनुसार मुशर्रफ़ ने कहा था कि दोनों देशों के बीच भरोसा क़ायम करने के लिए उठाए गए क़दमों की दिशा में प्रगति हुई है और कश्मीर में नियंत्रण रेखा के दोनों ओर युद्धविराम सफलतापूर्वक क़ायम रहा है, लेकिन विवादित मुद्दे के हल के मामले पर प्रक्रिया थम गई है.

मुशर्रफ़ ने इशारा किया कि अब वो और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक समझौते के बहुत क़रीब हैं. दस्तावेज़ में मुशर्रफ़ कहते हैं, "जल्द ही...इतनी जल्दी कि जितना किसी ने सोचा भी नहीं होगा."

Image caption परवेज़ मुशर्रफ़ ने पहले भी दावा किया था कि वो भारत के साथ कश्मीर पर समझौते के बहुत क़रीब थे.

मुशर्रफ़ ने मनमोहन सिंह की नम्रता और उनके लचीलेपन की सराहना की और इसके लिए उस निमंत्रण का उदाहरण दिया जो मनमोहन सिंह ने ख़ुद परवेज़ मुशर्रफ़ को अप्रैल में दिल्ली में होने वाले सार्क देशों की बैठक के लिए दिया था.

उस बैठक में आने का निमंत्रण मुशर्रफ़ ने क्यों ठुकराया, इसके बारे में उन्होंने बताया कि इस वक्त उसे लेकर बहुत उम्मीदें और उल्लास है और "अगर मैं दिल्ली गया और हमने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए तो लोग सोचेंगे कि हम विफल हो गए."

31 जनवरी 2007, बुधवार के दिन पाकिस्तान में अमरीका के तत्कालीन उच्चायुक्त रयान सी क्रोकर ने जो संदेश भेजा है, उसके मुताबिक मुशर्रफ़ ने नई दिल्ली को दो विकल्प दिए.

एक तो ये था कि या तो ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए अप्रैल से पहले पाकिस्तान आएं या फिर दिल्ली में सार्क देशों की बैठक के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर के समारोह का आयोजन हो.

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