26/11: कई देशों ने ख़ुद को अलग रखा

  • 2 दिसंबर 2010
ताज होटल
Image caption इन हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था

विकीलीक्स के एक दस्तावेज़ के अनुसार मुंबई में 26/11 को हुए हमलों के बाद कई देशों ने इस मामले से ख़ुद को अलग रखने का फ़ैसला किया था.

न्यूज़ीलैंड के एक अख़बार न्यूज़ीलैंड हेराल्ड ने मुंबई पर हुए हमलों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया के बारे में विकीलीक्स पर प्रकाशित दस्तावेज़ों के आधार पर यह ख़बर प्रकाशित की है.

इन दस्तावेज़ों में दिसंबर, 2008 में भेजे गए संदेशों के विवरण हैं.

उल्लेखनीय है कि मुंबई में 26/11 को हुए हमलों में 183 लोग मारे गए थे और बहुत से लोग घायल हुए थे. इनमें कई विदेशी नागरिक भी थे.

इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में एक बार फिर तनाव पैदा हो गया था और भारत ने शांति वार्ता की प्रक्रिया रोक दी थी.

'दूरी रखेंगे'

अख़बार ने दस्तावेज़ों के हवाले से कहा है कि मुंबई में हुए हमलों के बाद न्यूज़ीलैंड, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा के राजनयिकों ने एक बैठक की थी.

Image caption विकीलीक्स पर प्रकाशित हो रहे दस्तावेज़ों से दुनिया भर में हलचल मच गई है

इस बैठक में तय किया गया था कि वे भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहे 'आरोप-प्रत्यारोप में फँसने' से बचेंगे.

इस बैठक में यह भी तय किया गया था कि भारत को किसी भी तरह की सहायता देने का प्रस्ताव भी सावधानी पूर्वक देंगे क्योंकि इसे राजनीति से प्रेरित माना जा सकता है.

दस्तावेज़ों के अनुसार इससे पहले उन्होंने यह भी फ़ैसला किया था कि हमलों के लिए 'भारत के ख़ुफ़िया तंत्र की भारी विफलता' को ज़िम्मेदार ठहराने की बजाय वे सहानुभूति का संदेश भेजेंगे.

विकीलीक्स के दस्तावेज़ों के अनुसार भारत में अमरीका के तत्कालीन राजदूत डेविड मलफ़र्ड ने क़यास लगाए थे कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी का हाथ हो सकता है.

'मिलियन डॉलर क्वेश्चन' शीर्षक से भेजे गए संदेश में उन्होंने कहा है कि ये हमले पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी और चरमपंथी गुट लश्करे तैबा के बीच गठजोड़ का परिणाम भी हो सकता है.

लेकिन उन्होंने कहा है, "अभी इस बात के सबूत नहीं हैं कि हमलों के निर्देश आईएसआई ने दिए या उसकी तैयारियों में कोई भूमिका निभाई."

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