‘अफ़ग़ानिस्तान पर ब्रिटेन से नाखु़श है अमरीका’

  • 3 दिसंबर 2010
Image caption अमरीकी उच्चायोग का मानना है कि हेलमंद में ब्रिटेन की सेना ने वैसा काम नहीं किया जैसी उनसे उम्मीद थी.

विकीलीक्स की ओर से जारी अमरीका के कूटनीतिक दस्तावेज़ों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान युद्ध को लेकर अमरीका ने अपने प्रमुख सहयोगी ब्रिटेन की कड़ी आलोचना की है.

इन दस्तावेज़ों के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई सहित अमरीकी अधिकारियों का भी ये मानना है कि ब्रिटेन की सेना, अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत में शांति बहाल करने के अपने मिशन पर खरी नहीं उतरी.

2007 में हेलमंद को लेकर ब्रिटेन की सेना की कोशिशों की आलोचना करते हुए नाटो सुरक्षा बल के प्रमुख जनरल डैन मैक्निल ने कहा था कि ' ब्रिटेन की सेना ने हेलमंद में हालात और बद्तर बना दिए.'

ब्रिटेन के शाही परिवार पर भी टिप्पणियां

ब्रिटेन के समाचार पत्र गार्डियन ने इन दस्तावेज़ों के हवाले से बताया है कि अमरीकी सांसद जॉन मैकेन के साथ के मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति करज़ई ने कहा था कि उन्हें इस बात की खुशी है कि हेलमंद में ब्रिटेन की सेना के बजाय फिर अमरीकी सेना को ही भेजा रहा था.

इन दस्तावेज़ों में एक टिप्पणी के तौर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति करज़ई ने कहा था, ''हेलमंद में एक महिला ने मुझसे कहा कि ब्रिटेन की सेना को वापस बुला लिया जाए और अमरीकी सेना को वापस भेजा जाए.''

'उम्मीद पर खरे नहीं उतरे'

2008 के एक दस्तावेज़ के मुताबिक अमरीकी उच्चायोग ने इस बारे में कहा, ''राष्ट्रपति करज़ई और अमरीकियों का मानना है कि ब्रिटेन की सेना ने हेलमंद में वैसा काम नहीं किया जैसी उनसे उम्मीद थी.''

एक अन्य दस्तावेज़ में अफ़ग़ानिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री रंगीन ददफ़ार स्पानता ने हेलमंद में ब्रिटेन के 2000 सैनिकों की बहाली पर खेद जताते हुए कहा, '' ब्रिटेन की सेना अमरीकी सैनिकों की तरह लड़ने में चुस्त नहीं है.''

दस्तावेज़ों के मुताबिक जनरल मैक्निल खासतौर पर ब्रिटेन की सेना के प्रदर्शन से निराश थे. उन्होंने कहा, ''उन्होंने हेलमंद में गलत तरीके से काम किया और हालात बद्तर हो गए.''

दोहरा रवैया

बीबीसी संवाददाता जोनाथन बेले के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान युद्ध में ब्रिटेन अमरीका का सबसे मज़बूत और प्रमुख सहयोगी रहा है और इन दस्तावेज़ों की ये जानकारियां दोनों देशों के बीच खटास पैदा कर सकती हैं.

हालांकि पहले भी दबी ज़बान में सेना के प्रदर्शन को लेकर ब्रिटेन की आलोचना होती रही है इसलिए ये कोई बड़ा खुलासा नहीं है. ब्रिटेन पहले ही सफ़ाई दे चुका है कि हेलमंद में उसके सैनिकों की संख्या इतनी नहीं थी कि वो पुरज़ोर तरीके से शांति बहाल कर सकते.

फिर भी अमरीकी अधिकारियों ने खुले तौर पर ब्रिटेन की कभी आलोचना नहीं की. ऐसे में इन दस्तावेज़ों की ये जानकारियों उनके दोहरे रवैये को दर्शाती हैं.

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