रूसी उपग्रह कक्षा में नहीं पहुंचे

  • 5 दिसंबर 2010
Image caption उपग्रह ले जाने वाला रॉकेट रास्ते से भटक गया

रूस के तीन उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करने में विफल रहे.

उन्हे रविवार को कज़ाकस्तान के बाएकोनूर अड्डे से प्रक्षेपित किया गया था.

रूसी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपग्रह और उन्हे ले जाने वाला रॉकेट संभवत: हवाई द्वीप के पास प्रशांत महासागर में जा गिरे हैं.

अधिकारियों ने बताया कि ये उपग्रह प्रमुख रॉकेट से अलग होने के बाद अपने निश्चित मार्ग से भटक गए थे.

ये उपग्रह रूसी नैविगेशन सिस्टम ग्लोनास का हिस्सा थे जिसे अमरीका के ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम या जीपीएस और यूरोप के गेलीलियो पोज़िशनिंग सिस्टम से मुक़ाबला करने के लिए विकसित किया जा रहा है.

इन उपग्रहों को रविवार को प्रोटोन-एम रॉकेट पर छोड़ा गया था.

रूस के अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उद्योग के एक सूत्र के अनुसार ये रॉकेट अपने तय मार्ग से कोई आठ डिग्री अलग घूम गए.

ग्लोनास कार्यक्रम

रूस इस वर्ष कई ग्लोनास उपग्रह सफलतापूर्वक छोड़ चुका है लेकिन ये उपग्रह अपनी तय कक्षा में नहीं पहुंच पाए.

ग्लोनास का विकास सोवियत संघ के काल में 1976 में शुरु किया गया था और ये आशा की जा रही थी कि 1991 तक दुनिया भर को कवर कर सकेगा.

1982 से कई उपग्रह छोड़े गए और 1995 तक ये उपग्रह मंडल पूरा हो गया. लेकिन आर्थिक कारणों इस कार्यक्रम को जारी रखना मुश्किल हो गया और इसे स्थगित कर दिया गया.

फिर 2007 में रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पूतिन ने एक आदेश जारी करके ग्लोनास को आम नैविगेशन के लिए खोल दिया गया. उन्होने संघीय अंतरिक्ष एजेंसी को इस प्रणाली की देखरेख करने और इसे विकसित करने के निर्देश भी दिए.

ये रेडियो आधारित उपग्रह नैविगेशन सिस्टम है जिसे सोवियत संघ की सेना के इस्तेमाल के लिए और बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाने पर छोड़ने में मदद के लिए तैयार किया गया था.

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