'मध्य पूर्व वार्ता पर संकट'

महमूद अब्बास
Image caption महमूद अब्बास ने इसराइली बस्तियों के विवाद के बाद शांतिवार्ता स्थगित कर दी थी

वरिष्ठ फ़िलीस्तीनी वार्ताकार नबील शाथ ने कहा है इसराइल के साथ सीधी वार्ता अब टूट चुकी है और यहूदी बस्तियों के बारे में उसके रूख़ में कोई बदलाव हुए बिना बातचीत शुरू नहीं होगी.

वहीं फ़िलीस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने कहा है कि इसराइल के यहूदी बस्तियाँ बनाना रोकने से इनकार करने से मध्य पूर्व शांतिवार्ता पर संकट छा गया है.

दोनों नेताओं के बयान अमरीका सरकार की इस घोषणा के बाद आए हैं जिसमें अमरीका ने कहा कि वो इसराइल को फ़िलीस्तीनी क्षेत्र में क़ब्ज़ा किए हुए इलाको़ं में यहूदी बस्तियाँ बनाने से रोकने के लिए समझाने का प्रयास बंद कर रहा है.

अमरीका ने साथ ही कहा है कि वो दोनों पक्षों के बीच शांति के प्रयास जारी रखेगा और इस सप्ताह वाशिंगटन में अमरीकी अधिकारी इसराइली और फ़िलीस्तीनी अधिकारियों के बीच अलग-अलग बैठक करेंगे.

इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि इसराइल बिना शर्त बातचीत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

मगर बीबीसी के येरूशलम संवाददाता का कहना है कि अभी ये स्पष्ट हो चुका है कि कई सप्ताह के प्रयास के बावजूद इसराइली प्रधानमंत्री पश्चिमी तट में बस्तियों के निर्माण पर रोक लगाने के बारे में गठबंधन के सहयोगियों का समर्थन हासिल नहीं कर पाए हैं.

संकट

अमरीका की पहल पर लगभग दो साल के अंतराल के बाद इस वर्ष सितंबर में वाशिंगटन में पहली बार शांतिवार्ता शुरू हो पाई थी.

लेकिन इसी महीने पश्चिमी तट में बस्तियाँ बनाने पर लगी 10 महीने की पाबंदी ख़त्म हुई और फिर इसराइल ने वहाँ निर्माण शुरू कर दिया.

इसके बाद फ़िलीस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने बातचीत स्थगित कर दी.

मगर अमरीका सुलह के प्रयास करता रहा और अंततः इस मंगलवार उसने घोषणा की कि इसराइल को बस्तियों के निर्माण पर पाबंदी को फिर से जारी रखने के लिए समझाने की उसकी कोशिश नाकाम रही.

फ़ीलीस्तीनी वार्ताकार नबील शाथ ने कहा है कि इससे अमरीका की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है.

उन्होंने कहा,"इससे निश्चित रूप से अमरीका की विश्वसनीयता तार-तार हुई है, वैसे अमरीका एक महत्वपूर्ण देश है और अमरीका का मित्र है, इसलिए हम प्रयास करेंगे कि वो कुछ करे. लेकिन वो अभी नाकाम रहे हैं."

अमरीका सरकार ने इसराइल में नेतन्याहू सरकार में दक्षिणपंथी नेताओं को समझाने के लिए कड़ी कोशिश की और इसराइल को 20 एफ़-35 युद्धक विमान देने की पेशकश भी की थी.

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