लंदन में हिंसा, संसद ने ट्यूशन फ़ीस बढ़ाई

छात्र और पुलिस

लंदन में ब्रितानी संसद के बाहर छात्रों के प्रदर्शनों, हिंसा और धक्का-मुक्की के बीच ब्रितानी सांसदों ने इंग्लैंड के विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फ़ीस में बढ़ोतरी को मंज़ूरी दे दी है.

इस सरकारी प्रस्ताव के ख़िलाफ़ लंदन में गुरुवार दिन भर ज़ोरदार छात्र प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने उस कार को भी निशाना बनाया जिसमें प्रिंस चार्ल्स और उनकी पत्नी डचेस ऑफ़ कॉर्नवॉल जा रहे थे.

कार का एक शीशा टूट गया और कार पर पेंट भी फेंका गया. बीबीसी संवाददाता जेम्स लैंस्डेल के अनुसार प्रिंस चार्ल्स और कमिला सुरक्षित हैं.

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि ये बहुत ही स्तब्ध कर देने वाली अफ़सोस की बात है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रिंस चार्ल्स की कार को निशाना बनाया.

धक्का-मुक्की और हिंसा

गुरुवार सुबह से ही हज़ारों छात्र वेस्टमिंस्टर स्थित संसद के बाहर जमा हो गए थे और पुलिस का घेरा तोड़कर संसद के बाहर तक जा पहुँचे.

पुलिस बलों के साथ उनकी धक्का-मुक्की भी हुई और घुड़सवार पुलिसकर्मी ने इन छात्रों को रोकने के कई प्रयास किए. छात्रों ने पुलिस पर बोतलें बरसाईं.

छात्रों ने प्लेकार्ड उठा रखे थे और कुछ के हाथ में तो स्नूकर के गेंद भी थे जिन्हें पुलिस के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया गया.

ये प्रदर्शन उस समय किए गए जब संसद में उच्च शिक्षा के विषय पर संसंदीय बहस हो रही थी. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पारलेयमेंट स्कवेयर और संसद की इमारत के बाहर झड़पें हुईं.

शाम के समय शहर के केंद्र में एक पारंपरिक क्रिसमस ट्री को आग लगा दी गई. लंदन के मुख्य शॉपिंग सेंटर ऑक्सफ़ोर्ड स्ट्रीट में कई दुकानों के शीशे तोड़ दिए गए.

पूरे दिन चले प्रदर्शनों, झड़पों और हिंसा में दस पुलिस अधिकारियों समेत 30 लोग घायल हुए हैं और पुलिस के मुताबिक 22 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन ने इस हिंसा को लोकतंत्र का अपमान बताया है.

लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस के आयुक्त सर पॉल स्टीफ़ेनसन ने कहा, "(लंदन में हुई) इस पूरी हिंसा की बहुत ही गंभीर और विस्तृत जाँच होगी. इसमें दस पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं. "

'चुनावी वादे निभाने की हालत में नहीं'

संसद ने उच्चा शिक्षा में बदलावों के इस क़दम को 21 मतों के बहुमत से पारित किया है. लंदन में बीबीसी के राजनीतिक संवाददाता रॉब वॉटसन के अनुसार ये उच्च शिक्षा में अहम बदलावों का प्रतीक है.

छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए हर वर्ष नौ हज़ार पाउँड तक की फ़ीस भरनी पड़ सकती है. ये वर्तमान फ़ीस के मुक़ाबले में लगभग तीन गुना है.

इस क़दम को ब्रितानी गठबंधन सरकार के लिए पहली अहम परीक्षा माना जा रहा है. गठबंधन सरकार में जूनियर सहयोगी दल लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सासंदों ने इस क़दम के ख़िलाफ़ वोट दिया है.

ग़ौरतलब है कि इंग्लैंड के विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फ़ीस बढ़ाने के प्रस्ताव पर सत्ताधारी गठबंधन के दोनों दलों--कंज़रवेटिव पार्टी और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी--में अंदरूनी फूट पड़ गई.

लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने, जिनमें उपप्रधानमंत्री निक क्लेग और वाणिज्य मंत्री विंस केबल भी शामिल हैं, चुनाव के दौरान ट्यूशन फ़ीस न बढ़ाने का वादा किया था लेकिन अब उनका कहना है कि वे इस वादे को निभाने की हालत में नहीं हैं.

मतदान में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के आधे से कम यानी 28 सांसदों ने ही इस क़दम के पक्ष में भाग लिया जबकि कंज़रवेटिव पार्टी के छह सांसदों ने इसके ख़िलाफ़ वोट किया.

इससे पहले भी लंदन, मैनचेस्टर, शेफ़ील्ड, ब्रिस्टल, ऑक्सफ़र्ड और कैम्ब्रिज जैसे शहरों में छात्रों ने कई बड़े प्रदर्शनों का आयोजन किया था.

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