पुरस्कार समारोह में लू की रिहाई की अपील

Image caption खाली पड़ी कुर्सी लू श्याबाओ के लिए.

ऑस्लो में नोबेल पुरस्कार समारोह में शांति पुरस्कार विजेता लू श्याबाओ की रिहाई की मांग करते हुए समिति के अध्यक्ष ने कहा है कि लू ने सिर्फ़ अपने नागरिक अधिकार का इस्तेमाल किया है.

नोबेल समिति के अध्यक्ष टूरबिएन यागलैन ने कहा कि समारोह में कोई और पुरस्कार नहीं दिया जाएगा क्योंकि लू श्याबाओ को इस समारोह में आने से रोक दिया गया है और ये दिखाता है कि ये पुरस्कार ज़रूरी था और उचित था.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी चीन के अधिकारियों से अपील की है कि लू श्याबाओ को रिहा कर दिया जाए.

लू इस समय चीन की एक जेल में देशद्रोह के आरोप में 11 साल की सज़ा काट रहे हैं. वो 54 साल के हैं और उन्होंने 1989 तियानेमन चौक पर हुए आंदोलन में अग्रनी भूमिका निभाई थी.

समारोह में लू श्याबाओ की कुर्सी खाली पड़ी थी और जो भाषण पुरस्कार लेने के बाद वो स्वयं देते उसे नार्वे की एक जानीमानी ऐक्ट्रेस लिव अलमैन ने पढ़ा.

नोबेल समिति के अध्यक्ष ने अपने भाषण में कहा कि 1.3 अरब लोगों की जनसंख्या के साथ चीन एक तरह से मानवता के बोझ को अपने कंधों पर उठाए हुआ है.

उनका कहना था, “यदि चीन ये साबित कर सके कि वो पूरे नागरिक अधिकारों के साथ अपनी आर्थिक तरक्की कर सकता है तो इसका पूरी दुनिया पर बहुत अच्छा असर होगा. लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो चीन की सामाजिक और आर्थिक संकट का पूरी दुनिया पर नकारात्मक असर होगा.”

उन्होंने कहा चीन के मानवाधिकार कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के रक्षक हैं और यदि उस नज़र से उन्हें देखा जाए तो वो बाग़ी नहीं है बल्कि आज की दुनिया में विकास के रास्ते के प्रतिनिधि हैं.

उनका कहना था कि आनेवाले समय में @लू के विचार चीन को और मज़बूत करेंगे."

संबंधित समाचार