महिलाओं की सुरक्षा बढ़ी

  • 11 दिसंबर 2010
Image caption राजधानी दिल्ली में महिलाओ की सुरक्षा बढ़ी

राजधानी दिल्ली में पुलिस ने रात में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए नए कदम उठाए हैं.

दिल्ली पुलिस ने ये क़दम राजधानी में हाल के दिनों में हुई बलात्कार की घटनाओं को देखते हुए उठाए है.

दो हफ़्ते पहले कॉल सेंटर में काम करने वाली एक महिला के सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई थी.

इन नए क़दमों के तहत कॉल सेंटर,कॉरपोरेशन कंपनियों और मीडिया संगठनों की ये सुनिश्चित करना होगा कि जो गाड़िया महिलाओं को लेकर जाएगीं वे उनके घर के दरवाज़े तक उन्हें छोड़ेगीं.

पुलिस का कहना है कि अगर कोई ड्राइवर बदमाशी करता है तो उसे जेल भेजा जा सकता है और दफ़तर को लापरवाही के लिए अपराधी माना जाएगा.

दो हफ़्ते पहले हुई बलात्कार की घटना में पाँच लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

ये घटना तड़के हुई थी जब ये महिला दफ़तर से लौट रही थी.दरअसल कॉल सेंटर की गाड़ी ने इस महिला को दक्षिणी दिल्ली में स्थित उनके घर के कुछ दूरी पर छोड़ा था.

इस 30 वर्षिय महिला ने पुलिस को ये जानकारी दी थी कि उसे कुछ लोगों ने पहले एक ट्रक में अगवाह किया और बाद में उसका एक के बाद एक उसका बलात्कार किया.

इस महिला के साथ उसकी सहयोगी भी थी लेकिन वो इन बदमाशों के चंगुल से निकलने में कामयाब रही.

औचक निरीक्षण

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार को दी गई जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता का कहना है,''पुलिस कंट्रोल रुम की वैन औचक निरीक्षण करेंगीं और इन संगठनों के लिए काम करने वाली गाड़ियों का पीछा कर पता लगाएँगी कि वे निर्देश का पालन कर रहीं हैं या नहीं.''

उनका कहना था,"ऐसी कोई भी महिला हमें सीधे तौर पर शिकायत भी कर सकती है."

उनका कहना था कि भी गाड़ियों में एक गार्ड का होना अनिवार्य होगा और इस नए निर्देश के अनुसार किसी भी महिला को गाड़ी के पीछे की सीट पर नहीं बिठाया जाएगा.साथ ही गाड़ी में ड्राइवर के साथ अकेली महिला नहीं होगी.

राजन भगत का कहना है,"अगर किसी महिला के घर के बाहर तक सड़क नहीं जाती है तो एक बंदूकधारी गार्ड उस महिला को घर तक छोड़ेगा,"

राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों जैसे नोएडा और गुड़गाँव सूचना प्रौधोगिकी उद्योग का गढ़ भी है और यंहा सैकड़ों की संख्या मे कॉल सेंटर जिसमें बड़ी तादाद में महिलाएं काम करती हैं.

पुलिस के अनुसार इस साल अब तक बलात्कार के 402 मामलें दर्ज किए जा चुके हैं.

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