समलैंगिक फ़ौजियों को फिर निराशा

  • 10 दिसंबर 2010
अमरीकी सैनिक
Image caption अमरीकी सेना प्रमुख और रक्षा मंत्री दोनों ने कहा है कि वे इस रोक को हटाने के पक्ष में हैं

अमरीकी सेना में समलैंगिक पुरुषों और महिलाओं के सार्वजनिक रुप से काम करने पर लगी रोक को ख़त्म करने की ओबामा सरकार की कोशिशें नाकाम हो गई हैं.

सरकार के प्रयास को झटका उस समय लगा जब यह प्रस्ताव संसद में गिर गया.

सीनेट में इस विषय पर चल रही बहस को रिपब्लिकन पार्टी ने 57-40 से रोक दिया. इसके बाद इस पर प्रस्ताव पर मतदान की संभावना भी समाप्त हो गई. डेमोक्रैट्स को इस बहस को जारी रखने के लिए कम से कम 60 वोटों की ज़रुरत थी.

जानकार लोगों का कहना है कि इस प्रस्ताव के गिरने से ओबामा की नीतिगत प्राथमिकताओं में से एक पर बहस ख़त्म हो गई है.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि इस प्रस्ताव के गिरने से वे 'बहुत निराश' हुए हैं.

संदेश

इस समय सेना में 'पूछो मत-बताओ मत' यानी 'डोंट आस्क -डोंट टेल' की नीति लागू है जिसका अर्थ है कि सेना में भर्ती के वक़्त और काम करते वक़्त न यह पूछा जाता है और न यह बताना आवश्यक है कि वे समलैंगिक तो नहीं हैं.

इसी महीने के शुरुआत में अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में कहा था कि यदि 'पूछो मत-बताओ मत'की नीति को ख़त्म कर दिया जाता है तो अमरीकी सेना के कामकाज पर अगर असर पड़ा भी तो बहुत थोड़ा पड़ेगा.

यह प्रस्ताव सेना के खर्च से जुड़े विधेयक का हिस्सा था.

लेकिन अब सीनेटर जो लीबरमैन ने कहा है कि वे इस प्रस्ताव को एक अगल विधेयक के रुप में लाएँगे. हालांकि यह साफ़ नहीं है कि वे ऐसा कर भी सकेंगे या नहीं.

लेकिन बीबीसी की वॉशिंगटन संवाददाता केटी कोनोली का कहना है कि प्रस्ताव का गिरना इस बात का ताल्लुक सेना में समलैंगिकों के काम करने या न करने से कम है और इस बात से ज़्यादा है कि डेमोक्रैट्स को रिपब्लिकन यह संदेश देना चाहते हैं कि कर-कटौती प्रस्ताव से पहले वे किसी और प्रस्ताव पर विचार न करें.

17 साल पुरानी नीति

'पूछो नहीं-बताओ नहीं' की नीति को 1993 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने लागू किया था.

राष्ट्रपति बराक ओबामा और कुछ सैन्य अधिकारी चाहते हैं कि इस क़ानून को बदल दिया जाए. राष्ट्रपति ओबामा कह चुके हैं कि वे सेना में समलैंगिकों के भर्ती के पक्ष में हैं. इससे पहले भी उनकी सरकार ने अमरीका के निचले सदन में एक विधेयक पारित किया था लेकिन सीनेट में यह पारित नहीं हो सका था.

समलैंगिकों की सेना में भर्ती पर रोक का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि यदि इसकी अनुमति दी गई तो सेना का मनोबल गिरेगा.

लेकिन दो महीने पहले एक अदालत ने इस रोक को ख़ारिज करते हुए राष्ट्रपति ओबामा के बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि इससे योग्य सैन्य कर्मियों को या तो झूठ बोलना होता है या फिर सेना में अपनी सेवाओं से ही हाथ धोना पड़ता है.

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन, इसराइल और दर्जनों अन्य देश समलैंगिकों को सेना में भर्ती की अनुमति देते हैं.

संबंधित समाचार