कानकुन में समझौते के आसार

गैस उत्सर्जन

कानकुन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में प्रतिनिधि ऐसे समझौते के क़रीब पहुँच गए हैं जिससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में काफ़ी कमी हो सकती है.

इससे पहले सम्मेलन में निराशा का माहौल था और ऐसा लग रहा था कि कोई समझौता हो ही नहीं सकता.

मेज़बान मैक्सिको ने एक नया मसौदा पेश किया और उसका लगभग सभी प्रतिनिधियों ने समर्थन किया और 1997 के क्योटो समझौते पर क़ायम रहने की हामी भर दी.

हालांकि अभी इस पर चर्चा चल रही है क्योंकि बोलिविया ने क्यूबा के साथ मिलकर विरोध दर्ज करवाया है कि ग्रीनहाउस गैसों की कटौती की जो सीमा तय की गई है वह काफ़ी कम है.

प्रतिनिधियों ने उन सरकारों के भाषणों का स्वागत किया जिनकी वजह से वार्ता के दौरान खींचतान होती रही. इनमें जापान, चीन और अमरीका शामिल हैं और उन्होंने एक के बाद एक इस प्रस्ताव का समर्थन किया.

कोष

जो जलवायु कोष प्रस्तावित है वह हर साल सौ अरब डॉलर एकत्रित करके उसका वितरण करेगा.

यह पैसा उन ग़रीब देशों को दिया जाएगा जिन पर कार्बन कटौती का असर पड़ेगा.

एक नई समिति का गठन किया जाएगा जो पर्यावरण सुरक्षा को लेकर योजनाएँ तैयार करने वाले देशों का समर्थन करेगी.

इसमें वनों की कटाई रोकने के लिए विकासशील देशों के लिए एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

इस मसौदे में जो भी प्रस्ताव है वह उससे भी काफ़ी कम है जिसकी मांग पिछले साल कुछ देश कोपेनहेगन सम्मेलन में चाहते थे.

वे आगे भी इसकी मांग करते रहेंगे.

लेकिन बीबीसी के पर्यावरण संवाददाता का कहना है कि जो प्रस्ताव रखा गया है उसने अगले साल संभावित क़ानूनी रुप से बाध्यकारी समझौते के लिए ज़मीन तैयार कर दी है.

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