हॉलब्रुक: विशेष भूमिका में विशेष दूत

  • 14 दिसंबर 2010
रिचर्ड हॉलब्रुक

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक अमरीका के सबसे अनुभवी राजनयिक में से एक थे.

हॉलब्रुक को 1995 के डेटन शांति समझौते में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है.

इस समझौते से ही बोस्निया युद्ध का अंत हुआ था.

हॉलब्रुक को 'बुलडोज़र' के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कहा जाता है कि वो परस्पर विरोधी नेताओं को बातचीत की मेज तक लाने में कई बार सफल रहे.

हॉलब्रुक विदेश मंत्रालय के शीर्ष राजनयिकों में रहे जिन्होंने वियतनाम और संयुक्त राष्ट्र में अमरीका का प्रतिनिधित्व किया था.

डेटन शांति समझौते के बाद हॉलब्रुक को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था.

विशेष दूत

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जनवरी, 2009 में हॉलब्रुक को पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के लिए अपना विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया था.

अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के मामले में ओबामा प्रशासन की विदेश नीति तय करने में हॉलब्रुक की बड़ी भूमिका मानी जाती है.

राष्ट्रपति ओबामा के दूत के रुप में हॉलब्रुक कई बार अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से सीधे भिड़ गए थे.

अगस्त, 2009 में अफ़गानिस्तान के विवादास्पद राष्ट्रपति चुनावों के बाद भी हॉलब्रुक ने करज़ई से इस बारे में सीधे सवाल किए थे.

हालांकि काबुल स्थित अमरीकी दूतावास की प्रवक्ता ने इस बात का खंडन किया था कि हॉलब्रुक करज़ई पर चिल्लाए थे और बैठक छोड़ कर बीच में ही निकल आए थे.

अमरीकी जनरल स्टान्ले मैक्क्रिस्टल ने जून में रोलिंग स्टोन पत्रिका में छपे एक लेख में हॉलब्रुक की कड़ी आलोचना की थी.

मैक्क्रिस्टल को हॉलब्रुक पर की गईं टिप्पणियां महंगी पड़ीं और उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था.

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