सुरक्षा, सामरिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे जियाबाओ

  • 15 दिसंबर 2010
मनमोहन-वेन जियाबाओ (फ़ाइल फ़ोटो)

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ तीन दिनों की भारत यात्रा पर दिल्ली पहुँच गए हैं.

वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ सुरक्षा और सामरिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

जियाबाओ के साथ चीन से एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है. इनमें व्यापारी, वरिष्ठ मंत्री और शीर्ष अधिकारी शामिल हैं.

चीन के प्रधानमंत्री की यात्रा को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अति महत्वपूर्ण बताते हुए मंगलवार को कहा था कि वो सबसे बड़ा पड़ोसी देश है.

अहम रिश्ते

प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चीन न सिर्फ़ भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देश है बल्कि उसके साथ व्यापार भी बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि चीन दुनिया में सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और सशक्त आर्थिक शक्ति के रूप में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत भी उसके साथ निकटता के साथ काम कर रहा है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार चीनी प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत होगी और कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.

पिछले एक दशक में चीन और भारत के बीच आपसी व्यापार में काफ़ी प्रगति हुई है.

दोनों देशों के बीच व्यापार अब 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.

सहयोग और मतभेद

लेकिन कई ऐसे राजनीतिक मुद्दे हैं जिन पर दोनों देशों के बीच मतभेद बना हुआ है.

इनमें से एक है भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के लोगों को चीन के स्टेपल यानी नत्थी वीज़ा दिया जाना.

इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा कि भारत पहले भी ये मुद्दा उठाता रहा है और इस बार भी ये बातचीत का अहम मुद्दा होगा.

विष्णु प्रकाश का कहना था, ''ये मुद्दा हमारी प्रमुख चिंताओं में से एक है और हमारे चीनी साथी इस बात को भलीभांति जानते हैं. ये ठीक है कि दोनों देशों के बीच तमाम मुद्दों पर मतभेद हैं लेकिन ये एक दूसरे के पड़ोसी होने के नाते स्वाभाविक है. इन्हें दूर करने के रास्ते भी तलाशे जाएंगे.''

चीनी मामलों की विशेषज्ञ अलका आचार्य ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि दोनों देशों के लिए ये ज़रूरी है कि वे समझदारी और परिपक्वता से विवादित मुद्दों को सुलझाएँ.

अलका आचार्य का कहना था कि 21वीं शताब्दी में चीन और भारत न केवल एशिया बल्कि अहम हैं और ये दोनों देश भलीभांति जानते हैं.

जियाबाओ का कार्यक्रम

विश्व में चीन के बढ़ते हुए आर्थिक और राजनीतिक दबदबे को ध्यान में रखते हुए भारत ने माध्यमिक स्तर पर अगले वर्ष से चीनी भाषा की पढ़ाई की व्यवस्था करने का फ़ैसला किया है.

ये फ़ैसला दोनों देशो के बीच विश्वास बहाली के उपायों में से एक माना जा रहा है.

चीनी प्रधानमंत्री बुधवार को राजधानी में टैगोर इंटरनेशनल स्कूल जाएंगे और वहां के विद्याथियों से बात करेंगे.

बृहस्पतिवार को वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगे जिसके बाद दोनों देशों के बीच कई व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किये जाएंगे.

इसके बाद चीनी प्रधानमंत्री भारत चीन रिश्तों पर एक भाषण देंगे.

भारत का दौरा पूरा करने के बाद शुक्रवार को चीनी प्रधानमंत्री दो दिनों की यात्रा के लिए पाकिस्तान रवाना हो जाएंगे.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

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