'कमज़ोर पड़ रहा है अल क़ायदा'

  • 16 दिसंबर 2010

अफ़गानिस्तान में रणनीति के बारे में हुई अमरीकी समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2001 के बाद से पाकिस्तान में अल क़ायदा का नेतृत्व सबसे कमज़ोर स्थिति में है.

व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान और अफ़गा़निस्तान में अमरीकी रणनीति पर पाँच पन्नों का सारांश जारी किया है. इस मुद्दे पर बराक ओबामा गुरुवार को बाद में भाषण देंगे.

राष्ट्रपति बराक ओबामा की समीक्षा के मुताबिक अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में इतनी प्रगति कर ली है कि वो जुलाई 2011 में सैनिकों की कटौती शुरु कर सकता है.लेकिन साथ ही ये भी कहा गया है कि तालिबान के ख़िलाफ़ अमरीकी सैनिकों ने जो ये भी सफलता हासिल की है वो स्थितियाँ कभी भी बदल सकती हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में तैनात नैटो की योजना है कि वो 2014 के अंत तक देश की सारी ज़िम्मेदारियाँ अफ़ग़ान लोगों को सौंप दे.

ये समीक्षा ऐसे समय आई है जब अफ़ग़ानिस्तान में 2001 के अमरीकी अभियान के बाद से सबसे ज़्यादा नागरिकों और सैनिकों की मौत हुई है. सबसे ज़्यादा अमरीकी सैनिक हताहत हुए हैं.

नाज़ुक हालात

समीक्षा में कहा गया है, “पाकिस्तान में अल क़ायदा नेतृत्व कमज़ोर पड़ा है और दवाब में है. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने जो पकड़ बनाई हुई थी उसमें ज़्यादातर हिस्सों में कमी आई है.”

लेकिन बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस सबसे परे असली तस्वीर हेलमंद और कंधार में समझ आती है जहाँ चरमपंथी जी-जान लगाकर जूझ रहे हैं और ये चरमपंथ ग़ज़नी जैसे प्रांतों में भी बढ़ रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में नैटो कमांडर जेनरल डेविड पेट्रियस के अनुसार कई ऐसे चरमपंथियों ने अफ़ग़ान सरकार और गठबंधन सेना से संपर्क किया है जो हथियार डालना चाहते हैं.

हालांकि तालिबान नेता सार्वजनिक तौर पर सरकार से सीधी बातचीत से इनकार करते रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान में एक लाख पचास हज़ार नैटो सैनिक तैनात हैं.

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