गज़ा कारवाँ को मिल रहा है भारी समर्थन

गज़ा कारवाँ

दिल्ली से फ़लस्तीनी लोगों के लिए समर्थन जुटाने निकला 'गज़ा कारवाँ'सीरिया पहुँच गया है.

यह कारवाँ पाकिस्तान, ईरान और तुर्की से गुज़र चुका है. इस कारवाँ में शामिल लोगों का कहना है कि इसे लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है और इन्होंने रास्ते में फ़लस्तीनियों के लिए बहुत सी सहायता सामग्री जुटा ली है.

हालांकि 'गज़ा कारवाँ' ने जो सहायता सामग्री जुटाई थी वह अभी भी भारत सरकार की अनुमति का इंतज़ार कर रहा है और अब तक भारतीय बंदरगाह से रवाना नहीं हो सका है.

इस कारवाँ को सीरिया से मिस्र पहुँचना है जहाँ से योजना के अनुसार वे 27 दिसंबर गज़ा में प्रवेश करेंगे.

भारी स्वागत

इस कारवाँ में शामिल वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार ने दमिश्क से बीबीसी को बताया कि इन देशों से गुज़रने से पहले उन्हें यह अंदाज़ा ही नहीं था कि इन देशों में फ़लस्तीनियों के लिए इतना बड़ा समर्थन हासिल है.

उन्होंने बताया, "हम जहाँ-जहाँ से गुज़रे हैं वहाँ आधी-आधी रात को भी शू्न्य से कम तापमान में भी लोग छोटे-छोटे बच्चों के साथ कारवाँ का इंतज़ार करते मिले."

सुनील कुमार का कहना है कि फ़लस्तीनियों के लिए लोगों ने दिल खोलकर मदद दी है.

उनका कहना है कि ईरान के सांसदों ने और संसद के कर्मचारियों ने करोड़ों रुपए की सहायता राशि जुटाई है जिससे फ़लस्तीनियों के लिए कई एम्बुलेंस ख़रीदी जा रही है.

कारवाँ के आयोजकों का कहना है कि इसके अतिरिक्त बहुत सा सामान भी सहायता सामग्री के रुप में मिला है जिसमें चिकित्सा सामग्री और बच्चों के खिलौने भी हैं.

Image caption गज़ा कारवाँ के स्वागत में भारी संख्या में लोग एकत्रित हो रहे हैं

जब दिल्ली से इस कारवाँ की शुरुआत हुई थी तो इसमें क़रीब 50 लोग थे लेकिन अब इसमें इतने लोग शामिल हो चुके हैं कि उन्हें तीन बडी़ बसों और दो छोटी बसों से चलना पड़ रहा है.

सुनील कुमार कहते हैं, "हमारे साथ 15 से अधिक देशों के कार्यकर्ता जुड़ चुके हैं और अब स्थिति यह है कि पाकिस्तान और दूसरे देशों से आकर इस कारवाँ में जुड़ने वाले लोगों को मना करना पड़ रहा है क्योंकि रास्ते में उनके लिए इंतज़ाम करना मुश्किल हो जाएगा."

इस बीच कारवाँ के 30 से अधिक लोग फ़लस्तीनी लोगों के लिए समर्थन जुटाने के लिए लेबनान भी गए हुए हैं.

आशंका

इस 'गज़ा कारवाँ' में उस जहाज़ी बेड़े में सवार रहे नौ लोग भी जुड़े हुए हैं जिस पर इसी साल मई में इसराइल ने हमला कर दिया था. यह जहाज़ी बेड़ा गज़ा के लोगों के लिए राहत सामग्री लेकर जा रहा था.

उन लोगों का कहना है कि जिस समय इसराइल ने जहाज़ी बेड़े पर हमला किया, वह इसराइली सीमा में नहीं था. उस हमले में नौ लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे.

कारवाँ में शामिल लोगों का कहना है कि इस समय भी गज़ा में इसराइली हमले हो रहे हैं.

इन लोगों को आशंका है कि इस 'गज़ा कारवाँ' पर भी इसराइल का हमला हो सकता है.

तीन महीने की कश्मीरी सहयात्री

Image caption ये तीन महीने की बच्ची कारवाँ की सबसे कम उम्र की सहयात्री है

'गज़ा कारवाँ' के आयोजकों का कहना है कि इसमें अलग-अलग राष्ट्रीयता और उम्र के लोग हैं.

इनमें सबसे अधिक उम्र के व्यक्ति 71 वर्ष के हैं जो केरल के एक मज़दूर यूनियन के सदस्य हैं.

जबकि सबसे कम उम्र की कारवाँ सदस्य एक तीन महीने की बच्ची है.

सुनील कुमार का कहना है कि ये बच्ची एक कश्मीरी युवक की बेटी है.

उन्होंने बताया कि ये कश्मीरी युवक चार साल का था जब वह ईरान आ गया था और उसी ने ईरान में कारवाँ के लिए सारे इंतज़ाम किए.

"ये कश्मीरी युवक अब अपनी पत्नी और तीन महीने की बच्ची के साथ इस कारवाँ का हिस्सा है."

सुनील कुमार का कहना है कि इस यात्रा में अब तक किसी तरह की परेशानी नहीं हुई है और हर जगह इसका बारात की तरह स्वागत किया गया है.

उनका कहना है कि बावजूद इसके कि इस कारवाँ पर हमले का ख़तरा है, लोग साथ चलने में हिचक नहीं रहे हैं.

सामान अटका

Image caption कारवाँ को वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान जाने में भी ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी थी

इस 'गज़ा कारवाँ' ने फ़लस्तीनियों के लिए क़रीब 25 लाख की चिकित्सा सामग्री एकत्रित की थी.

यह सामग्री अभी भी रवाना नहीं हो सकी है क्योंकि इसके लिए भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की अनुमति की आवश्यकता होती है जो अभी तक नहीं मिल सकी है.

'गज़ा कारवाँ' के आयोजकों की ओर से अनुमति का प्रयास कर रहीं रोज़ा ने बीबीसी को बताया, "ये सामग्री अभी भारत में ही है लेकिन हम वाणिज्य और विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं और हमें उम्मीद है कि इसकी अनुमति जल्दी ही मिल जाएगी."

पहले ये माना जा रहा था कि अगर ये सामग्री समय से नहीं पहुँची तो कारवाँ को मिस्र के रास्ते गज़ा में प्रवेश की अनुमति नहीं मिल सकेगी क्योंकि मिस्र सरकार आमतौर पर ऐसे किसी समूह को गज़ा में प्रवेश की अनुमति नहीं देती जो सहायता सामग्री लेकर न आ रहा हो.

लेकिन अब ये संकट एक तरह से समाप्त हो चुका है क्योंकि कारवाँ ने रास्ते में बहुत सी राहत सामग्री एकत्रित कर ली है जिसे लेकर वे गज़ा जा सकते हैं.

रोजा़ ने बताया कि जो सामग्री यहाँ रूकी हुई है उसमें चिकित्सा सामग्री है और ज़्यादातर हडिड्यों के इलाज में काम आने वाली चीज़ें हैं.

'गज़ा कारवाँ' के लोग चाहते हैं कि वे नया साल गज़ा के लोगों के साथ मिलकर मनाएँ लेकिन अभी यह पता नहीं है कि उन्हें गज़ा में प्रवेश की अनुमति कब मिलेगी और कितने दिनों तक ठहरने का अवसर मिलेगा.

संबंधित समाचार