कट्टरपंथ से बचाने के लिए घर वापसी का आदेश

तजाकिस्तान
Image caption तजाकिस्तान में युवाओं के एक वर्ग में इस्लामी शिक्षा का काफ़ी चलन है

दूसरे देशों में धार्मिक शिक्षा ले रहे ताजिकिस्तान के सैकड़ों छात्रों को देश वापस आने का आदेश दिया गया है.

ग़ौरतलब है कि ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति ने छात्रों को 'इस्लामी कट्टरपंथ के प्रभाव से बचाने के लिए' ऐसा आदेश दिया था.

बीबीसी के संवाददाता रेहान देमित्रे का कहना है कि इस वर्ष अगस्त में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमालि रहमान ने मुस्लिम देशों में शिक्षा ले रहे छात्रों के माता-पिता से अपने बच्चों को देश वापस बुलाने को कहा था.

ताजिकिस्तान में सरकारी शिक्षा की स्थिति लचर है और वहाँ के छात्र धार्मिक शिक्षा के लिए मिस्र, ईरान और पाकिस्तान जाते रहे हैं.

इमोमिल रहमान ने चेतावनी दी थी कि छात्रों को बाहर के देशों में सही शिक्षा नहीं दी जा रही है और उग्र विचारधारा के प्रभाव में उनके आने का ख़तरा है.

छात्रों के वापस लौटने पर सुरक्षाबल के सदस्य उनसे शिक्षा-दीक्षा के बारे में पूछते हैं.

छात्रों से पूछताछ

सुरक्षा बल के एक सदस्य ने बीबीसी को बताया कि विदेशों में पढ़ने गए छात्रों को विचार और मत में शिक्षित किया जाता है.

इस सदस्य का दावा है कि उन्होंने वापस लौट कर आए कई छात्रों से पूछताछ की है. उनका कहना है कि कई छात्रों के कंधों पर खरोचें भी दिखी हैं क्योंकि वे हथियारों का इस्तेमाल करते थे.

हालांकि विपक्ष के नेता मोहम्मद कबीरी का कहना है कि छात्रों को संभावित आतंकवादी कहना या चरमपंथ से जोड़ कर देखना ग़लत है.

कबीरी ने बताया कि धर्मनरिपेक्ष संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों को कुछ अक्षम अधिकारियों ने दबाव डाल कर वापस बुलाया है और वे इस बात से आहत हैं.

हाल के महीनों में ताजिकिस्तान को सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

पिछले दिनों खुदजंद के पुलिस चौकी पर एक आत्मघाती हमला हुआ था, साथ ही अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास ताजिकिस्तान के पूर्वी इलाके में सरकारी सुरक्षा बलों और इस्लामी चरमपंथियों के बीच हफ़्तों तक संघर्ष हुआ था.

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