खाने की कमी पूरी करेंगे ऊंट और शुतुरमुर्ग़

ऊंट
Image caption ऊंट रेगिस्तान का जानवर है और अधिकतर वहीं पाया जाता है

श्रीलंका में सरकार का कहना है कि वह खाद्य और कृषि के क्षेत्र में विविधता लाने के लिए दो नए प्रयोग करने की योजना बना रही है.

इसके तहत श्रीलंका की सरकार दूध के लिए ऊंटों और शुतुरमुर्ग को अंडों और मांस के लिए शुतुरमुर्ग़ पालेगी.

पशुपालन उपमंत्री एच आर मिथरापाला की इस घोषणा का कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार को देश के रोज़मर्रा के खाने की कई वस्तुओं का आयात करना पड़ रहा है.

यहाँ तक कि सरकार को चिकन, मुर्गियों के अंडे और देश के प्रतिदिन के खाने में इस्तेमाल होने वाले नारियल तक का आयात करना पड़ रहा है.

सरकार की इस घोषणा पर कई सासंदों ने आश्चर्य व्यक्त किया है.

पशु पालन उपमंत्री का कहना है, ''हम ऊंट और शुतुरमुर्ग़ को विदेशों से आयात करने की योजना बना रहे है. शुतुरमुर्ग़ के आयात से हम खाद्य क्षेत्र में आ रही समस्याओं का हल निकाल पाएंगे. हम ऊंट के दूध की भी बात कर रहे हैं. इसमें कोई बुराई नहीं है. हम ऊंट को सूखे क्षेत्रों में पाल कर इसका परीक्षण करेंगे.''

ऊंट रेगिस्तान का जानवर है और उसके दूध के बारे में कहा जाता है कि उसमें कमोत्तजक गुण होते है.

उपमंत्री ने ऊंट के आयात का ये कारण तो नहीं बताया लेकिन ये ज़रूर कहा कि अरब देशों से आने वाले पर्यटकों को ये दूध पिलाकर उन्हें घर जैसा महसूस करवाना चाहते है.

Image caption शुतुरमुर्ग़ ज़्यादारतर अफ्रीका में पाए जाते हैं

विपक्षी सांसद और अर्थशास्त्री हर्ष डिसिल्वा का कहना है कि जब उन्होंने सरकार की इस योजना के बारे में सुना तो उन्हें हंसी आई.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि सरकार को मवेशी डेरी उद्योग में निवेश करना चाहिए.

उनका कहना है, ''सरकार ज़्यादातर दूध का आयात करती है जो कि मंहगा भी मिलता है. यही कारण है कि छह से पांच साल की उम्र के 30 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं.''

लेकिन मिथरपाला ने बीबीसी से कहा कि श्रीलंका को अलग-अलग तरह के मौसम का सामना करना पड़ता है और ऐसे में ऊंट, शुतुरमुर्ग़ और अन्य पशुओं को पालना कोई मुश्किल काम नहीं है.

उनका कहना था कि चाय की पत्ती और रबर की फसलों के बीज भी बाहर से लाकर ही लाकर लगाए गए थे जिससे ख़ासा फ़ायदा हो रहा है.

सरकार का कहना है कि वह अपने ही देश में खाद्य उत्पादन पर लगातार काम कर रही है लेकिन हाल ही में चिकन, अंडों और रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आने वाले खाद्यपदार्थ नारियल की आपूर्ति में आई कमी के कारण उन्हें भारत और मलेशिया से मंगाना पड़ रहा है.

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