चीन में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कड़े क़दम

Image caption भ्रष्ट अधिकारियों के ख़िलाफ़ आम जनता का आक्रोश

चीन का कहना है कि भ्रष्टाचार अब भी एक गंभीर समस्या है और इससे निबटने के लिए नए उपाय किए जाएंगे.

अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही मुहिम की पहली रिपोर्ट प्रकाशित की है.

इस रिपोर्ट के अनुसार 2003 से लेकर 2009 तक रिश्वत और गबन के दो लाख 40 हज़ार मामलों की जांच की जा चुकी है.

चीन के साम्यवादी नेता अक्सर कहते है कि भ्रष्टाचार देश की राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ा ख़तरा है.

लेकिन जैसे जैसे चीन में आर्थिक विकास हुआ है भ्रष्टाचार भी बढ़ा है. धनी और निर्धन के बीच की खाई और चौड़ी हो गई है.

कम्युनिस्ट पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारी वू यूलियांग कहते हैं, “अनुशासन और जांच अधिकारियों ने देश भर में विभिन्न स्तरों पर जितने मामलों की जांच की और उन्हे निबटाया उनकी संख्या पिछले साल के मुक़ाबले अधिक है.”

भ्रष्टाचार पर रिपोर्ट

इस दस्तावेज़ में भ्रष्ट व्यवहार का पर्दाफ़ाश करने में समाचार माध्यमों और इंटरनेट की भूमिका की प्रशंसा की गई है.

भ्रष्टाचार पर प्रकाशित इस दस्तावेज़ में नए नियमों का भी ज़िक्र है जो कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को अपनी आय और निवेश के बारे में जानकारी देने को बाध्य करेंगे.

पार्टी ने ये भी कहा है कि वो सरकारी दावतों और गोष्ठियों पर होने वाले अत्यधिक ख़र्च पर भी लगाम लगाएगी.

लेकिन आलोचकों का कहना है कि भ्रष्टाचार व्यवस्था में इतना रच-बस गया है कि मूलभूत सुधारों के बिना इस समस्या का हल करना संभव नहीं है.

हाल के वर्षों में चीन में कई भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाए गए हैं.

इनमें से एक में शंघाई शहर के कम्युनिस्ट पार्टी के एक शक्तिशाली अधिकारी को 2008 में 18 साल की जेल हुई थी. उन्हे पेंशन कोष घोटाले से संबद्ध होने का दोषी पाया गया था.

जुलाई 2010 में चॉंगचिंग शहर के शीर्ष न्याय अधिकारी वेन चियांग को रिश्वत, बलात्कार और आपराधिक गिरोहों का बचाव करने के आरोप में मृत्युदंड दिया गया था.

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