मज़दूर नेता जयाबेन का निधन

जयाबेन देसाई
Image caption जयाबेन ब्रिटेन की प्रेरणाप्रद नेता थी जिन्होने आप्रवासी श्रमिकों के सम्मान के लिए संघर्ष किया

आप्रवासी महिला मज़दूरों की आवाज़ कही जाने वाली जयाबेन देसाई का लंदन में निधन हो गया है. वो 77 वर्ष की थीं.

सत्तर के दशक में उन्होंने भारतीय मूल की महिला श्रमिकों के कई विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया और ये संगठन ‘स्ट्राइकर्स इन सारीस’ यानि साड़ी-हड़तालियों के नाम से जाना जाने लगा.

जयाबेन का जन्म गुजरात में हुआ था. जब उनका विवाह तंज़ानिया की टायर बनाने वाली एक कम्पनी के मैनेजर सूर्यकांत देसाई से हुआ तो वो तंज़ानिया चली गईं.

सत्तर के दशक में पूर्वी अफ़्रीका से दसियों हज़ार एशियाइयों को निष्कासित कर दिया गया तो वो ब्रिटेन चले आए और अधिकतर यहां की फ़ैक्टरियों में कम वेतन पर काम करने लगे.

जयाबेन और उनके पति भी उनमें से एक थे.

ग्रुनविक हड़ताल का नेतृत्व

बाद में जयाबेन उत्तर पश्चिमी लंदन स्थित ग्रुनविक फ़िल्म प्रोसैसिंग लेबोरेटरी में काम करने लगीं.

कंपनी का प्रबंधन पूरी तरह से अंग्रेज़ों के हाथों में था और वो कर्मचारियों को धमकियों, अपमान और उत्पीड़न के ज़रिए क़ाबू में रखते थे.

इस कंपनी में मज़दूर संगठन बनाने की इजाज़त नहीं थी लेकिन 20 अगस्त 1976 को जब ओवरटाइम का एक और निर्देश मिला तो जयाबेन ने अपने बेटे सुनील के साथ वॉकआउट कर दिया.

जाते-जाते उन्होने कंपनी के मैनेजर से कहा, "आप कोई फ़ैक्टरी नहीं चला रहे बल्कि चिड़ियाघर चला रहे हैं. लेकिन चिड़ियाघर में कई तरह के जानवर होते हैं."

"कुछ बंदर होते हैं जो आपकी उंगलियों के इशारे पर नाचते हैं और कुछ शेर होते हैं जो आपका सिर खा सकते हैं. मैनेजर साहब हम वो शेर हैं."

जब जयाबेन फ़ैक्टरी से बाहर आईं तो उनके साथ चार श्रमिक और थे जिन्होने काम की स्थितियों के विरोध में वॉकआउट किया था.

ये छह श्रमिक एपैक्स यूनियन में शामिल हो गए और उन्हें स्थानीय काले राजनीतिक संगठनों से समर्थन मिला.

हड़तालियों की एक सभा को संबोधित करते हुए जयाबेन ने कहा, "हमें हथियार नहीं डालने चाहिए. क्या गांधी जी ऐसा करते... कभी नहीं."

धीरे-धीरे उनका समर्थन बढ़ता गया और उसमें खनिक, पोस्ट ऑफ़िस कर्मचारी, कार बनाने वाली फ़ैक्टरियों के मज़दूर भी शामिल हो गए.

दो साल तक जयाबेन ने आंदोलन का नेतृत्व किया जिससे वो देश भर में जानी जाने लगीं और जल्दी ही राष्ट्रीय स्तर की नेता बन गईं.

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