पहले भाई फिर बहन की जान गई...

  • 2 जनवरी 2011
फ़लस्तीनी प्रदर्शनकारी
Image caption पश्चिमी तट् में इसराइली अवरोध के ख़िलाफ़ पांच साल से प्रदर्शन जारी है

मध्य पूर्व में पश्चिमी तट के बाइलिन में इसराइलियों के एक नाके पर पहले भाई और फिर बहन ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए अपनी जान गँवा दी है.

फ़लस्तीनी महिला जवाहिर अबू रहमे की शनिवार को उस समय मौत हो गई जब वह इसराइली सैनिकों द्वारा फेंके गए आंसू गैस के गोले की चपेट में आ गईं और गैस उनकी सांसों में चली गई.

वे बाइलिन में इसराइली बैरियर (अवरोध) के ख़िलाफ़ साप्ताहिक प्रदर्शन में शामिल थीं. पश्चिमी तट की 36 वर्षी जवाहिर अबू रहमे की मौत रमल्ला के एक अस्पताल में हुई.

जवाहिर के भाई बासेम अबू रहमे की 2009 में इसी तरह के एक प्रदर्शन के दौरान मौत हो गई थी.

बासेम इसराइली सैनिकों के एक गैस कनस्तर का निशाना बने थे जब वे पश्चिमी तट पर लगाए गए अवरोध के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में भाग ले रहे थे.

बासेम अबू रहमे से पहले भी बाइलिन के पास के एक गांव के पास एक अमरीकी की भी इसी तरह मौत हो गई थी जब उनके सर पर गैस कनस्तर लगा था.

बासेम की उम्र उस समय 30 साल थी और उन्होंने भी रमल्ला के एक अस्पताल में ही आख़री सांस ली थी.

आलोचना

फ़लस्तीनी अधिकारियों ने इसकी आलोचना करते हुए इसे "इसराईल का युद्ध अपराध" कहा है.

जबकि इसराइली सेना का कहना है कि विरोध प्रदर्शन 'अवैध था जो हिंसक और उग्र रूप ले चुका था' और यह कि वे इसकी जांच कर रहे हैं.

बहरहाल, जवाहिर के परिवार के वकील ने इसराइली सेना पर जांच पर पर्दा डालने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने करने के लिए इसराइली सैनिकों ने बहुत ज़्यादा गैस का इस्तेमाल किया.

Image caption इसराइली ग़ज़ा में बाइलिन गांव वालों के लिए समय समय पर रास्ता खोलते हैं.

इसके विपरीत फ़लस्तीनियों के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले इसराइली और अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि बाइलिन में पांच साल से जारी यह साप्ताहिक विरोध प्रदर्शन आम तौर पर शांतिपूर्ण रहा है. किसी-किसी में कुछ पत्थर-फेंकने वाले भी शामिल हो जाते थे.

इन प्रदर्शनकारियों पर इसराइली सैनिकों ने आंसू गैस, स्टन ग्रेनेड (भौंचक्का करने वाले हथगोले), रबर की गोलियाँ, और कभी कभी सच-मुच की गोलिया भी दाग़ी हैं.

कैसी गैस

रमल्ला में एक अस्पताल के इमर्जेंसी विभाग डॉयरेक्टर डॉक्टर मोहम्मद ईदी का कहना है, "जब जवाहिर को अस्पताल में लाया गया था तो उस समय गैस के सांस में चले जाने के कारण उनकी सांस बहुत कमज़ोर चल रही थी."

उन्होंने ये भी कहा कि अभी तक गैस का पता नहीं चल पाया है कि वह कौन सी गैस थी जिससे उनकी मौत हुई. उनका कहना है, "उन्हें फ़ौरन ही सांस लेने में मदद देने वाली मशीन पर रखा दिया गया था लेकिन शनिवार की सुबह उनकी मौत हो गई."

जवाहिर उन 250 प्रदर्शनकारियों में शामिल थीं जो पश्चिमी तट पर लगाए गए इसराइली अवरोध के ख़िलाफ़ जुमे के साप्ताहिक प्रदर्शन में भाग ले रही थे. कहा जा रहा है कि आंसू गैस का गोला प्रदर्शनकारियों के बीच फटा था.

जवाहिर के जनाज़े में लगभग 3000 फ़लस्तीनी शामिल हुए.

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