तेलंगाना की आशाओं को आघात

चंद्रशेखर राव
Image caption तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता ने सर्वदलीय बैठक में जाने से इंकार किया

एक अलग तेलंगाना राज्य के गठन का शांतिपूर्ण हल निकालने की आशाओं को भारी झटका लगा है.

तेलंगाना राष्ट्र समिति ने रविवार को घोषणा की कि वो गृहमंत्री पी चिदंबरम की ओर से दिल्ली में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाग नहीं लेगी.

गृहमंत्री चिदंबरम ने श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट पर विचार के लिए छ जनवरी को आंध्र प्रदेश के आठ राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई है.

लेकिन टीआरएस के अध्यक्ष के चन्द्रशेखर राव ने कहा कि उनकी पार्टी इस बैठक में प्रत्येक दल से दो प्रतिनिधियों को बुलाने के फ़ैसले से सहमत नहीं है.

उन्होने चिदंबरम को लिखे एक खुले पत्र में कहा कि केंद्र सरकार ऐसा करके हालात को और उलझाने की कोशिश कर रही है.

चन्द्रशेखर राव ने कहा कि अगर चिदंबरम की नीयत साफ़ है तो वो हर दल से केवल एक प्रतिनिधि बुलाएं और उससे तेलंगाना के विषय पर पार्टी का रुख पूछें.

राव को आशंका है कि इस बैठक का वही नतीजा निकलेगा जो पिछले साल जनवरी में बुलाई गई बैठक का निकला था.

उस समय कांग्रेस और तेलुगु देसम के प्रतिनिधियों ने तेलंगाना राज्य के मांग का समर्थन किया था जबकि आंध्र क्षेत्र के नेताओं ने उसका विरोध किया था.

भाजपा तेलंगाना के पक्ष में

चन्द्रसेखर राव ने कहा कि तेलंगाना राज्य के अलावा तेलंगाना के लोगों को कोई और बात स्वीकार्य नहीं होगी.

उन्होने मांग की कि तेलंगाना राज्य बनाने के लिए केंद्र सरकार संसद के आगामी अधिवेशन में विधेयक पेश करे.

टीआरएस के अलावा भारतीय जनता पार्टी की आंध्र प्रदेश इकाई ने भी बैठक में भाग न लेने का फ़ैसला किया है.

आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष किशन रेड्डी ने कहा कि उन्हे श्रीकृष्ण समिति से कोई मतलब नहीं है क्योंकि उसकी कोई क़ानूनी हैसियत नहीं है.

उन्होने कहा कि अगर कांग्रेस संसद में तेलंगाना का विधेयक पेश करती है तो भाजपा उसका समर्थन करेगी.

टीआरएस के फ़ैसले को खुद कांग्रेस के कुछ नेताओं का समर्थन मिला है.

यादव रेड्डी और के आर अमोस ने भी मांग की कि बैठक मैं पार्टी एक ही प्रतिनिधि को भेजे.

ऐसी ही मांग तेलुगु देसम के एक वरिष्ठ नेता के श्रीहरी ने भी की है और पार्टी से कहा है कि वो तेलंगाना राज्य की मांग पर अपना रुख़ स्पष्ट करे.

टीआरएस की घोषणा के साथ ही तेलंगाना क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और यह आशंकाएं व्यक्त की जा रहीं हैं कि तेलंगाना राज्य की मांग के समर्थन में इसी सप्ताह से विरोध शुरू हो सकता है.

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