पार्सल बम प्रयास एक सफल अभियान: अल क़ायदा

Image caption यमन से इन्सपायर पत्रिका के तीन अंक निकल चुके हैं

चरमपंथी संगठन अल क़ायदा ने पिछले साल अक्तूबर में अमरीका जा रहे मालवाहक विमानों को पार्सल बमों के ज़रिए उड़ाने की कोशिश को एक 'सफल अभियान' बताया है.

यमन से छपने वाली पत्रिका इन्सपायर, जिसमें बम हमलों के पक्ष में लिखा गया है और जो बम बनाने तक की तकनीक बताती है, यमन में अल क़ायदा गुट की पत्रिका मानी जाती है.

बीबीसी संवाददाता कीथ एडम्स के अनुसार इन्सपायर के ताज़ा अंक में लिखा गया है, "नोकिया के दो फ़ोन, एचपी के दो प्रिंटर, उसे समुद्री जहाज़ के ज़रिए भेजने और इससे संबंधित ख़र्च का कुल बिल है 4200 अमरीकी डॉलर. ये उस अभियान का ख़र्चा है....दूसरी इस तथाकथित 'विफल रहे अभियान' के बाद अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों को नए सुरक्षा इंतज़ाम करने के लिए अरबों डॉलर ख़र्च करने पड़ेंगे."

इस पत्रिका के अनुसार पश्चिमी देशों को निशाना बनाकर भविष्य में किए जाने वाले हमले इसी तरह के होंगे - बड़े-बड़े अभियान कम होंगे, छोट-छोटे अभियान ज़्यादा होंगे - एक ऐसी रणनीति जिसे 'ए थाऊज़ेंड कट्स' का नाम दिया गया है.

सुरक्षा मामलों के विश्लेषकों का कहना है कि यमन में स्थित अल क़ायदा का गुट बढ़ रहा है हालाँकि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में अल क़ायदा के लड़ाकों की संख्या घट रही है.

अमरीका के प्रिंसटन विश्वविद्यालय में यमन के विशेषज्ञ ग्रेगरी जॉनसन का कहना है, "वर्ष 2010 की शुरुआत में अल क़ायदा के ख़िलाफ़ यमन में हुए हवाई हमलों को उलटा असर हुआ. तब से ये संगठन बहुत फैला है और उसने हवाई हमलों और उसकी ख़बरों को इस्तेमाल किया है यमन में अपने सदस्यों की भर्ती बढ़ाने के लिए. इसलिए एक साल ख़त्म होने के बाद ख़ासे सदस्यों वाला एक बहुत ही सशक्त संगठन हमारे सामने है."

कीथ एडम्स का कहना है कि पर्यवेक्षकों का मानना कि अल क़ायदा के सदस्यों में विदेशी लड़ाके भी है जो इराक़ या अफ़ग़ानिस्तान जा चुके हैं.

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