भारत के विरोध के बावजूद क़ानून मंज़ूर

Image caption सैकड़ों बचावकर्मी मारे गए थे और अनेक बुरी तरह झुलस गए थे

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक नए क़ानून को मंज़ूरी दे दी है जिसके तहत 9/11 के हमले के बचावकर्मियों को मुफ़्त स्वास्थ्य सेवाएँ देने का प्रावधान है.

भारत ने इस सुविधा के लिए धन जुटाने के तरीक़े पर अपनी चिंता से अमरीका को अवगत कराया था लेकिन उसे नज़रअंदाज़ करते हुए अमरीकी राष्ट्रपति ने बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

मुफ़्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए 4.2 अरब डॉलर का एक कोष तैयार किया जा रहा है जिसके लिए अन्य स्रोतों के अलावा एच1बी वीज़ा की फ़ीस बढ़ाकर भी धन जुटाया जाएगा.

एच1बी वीज़ा कुशल कामगारों को दिया जाने वाला वीज़ा है जिसके तहत सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े भारत के लोग अमरीका जाते हैं.

भारत का कहना है कि इस तरह वीज़ा फीस बढ़ाए जाने से भारतीय कंपनियाँ और भारतीय आईटी पेशेवर, दोनों ही प्रभावित होंगे.

एक अनुमान के मुताबिक़ भारतीय कंपनियों पर बढ़ी हुई वीज़ा फ़ीस की वजह से 20 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त भार पड़ेगा.

इसके अलावा इस नई योजना के लिए धन जुटाने के वास्ते अमरीका विकासशील देशों से होने वाले आयात पर दो प्रतिशत की लेवी लगा रहा है, इन सूची में भारत से होने वाला आयात भी शामिल है.

भारत को चिंता है कि इस तरह भारतीय सामान का आयात महँगा हो जाएगा और अमरीकी कंपनियाँ भारतीय माल ख़रीदने से कतराएँगी.

भारत के वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने इसे पीछे की ओर जाने वाला क़दम बताया था, उन्होंने कहा था कि इससे भारत और अमरीका के व्यापारिक संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

बराक ओबामा ने कहा कि वे 'जेम्स ज़ैडरोगा 9/11 हेल्थ एंड कम्पनशेसन एक्ट' पर हस्ताक्षर करके बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं.

जेम्स ज़ैडरोगा न्यूयॉर्क पुलिस विभाग के एक अधिकारी थे जिनके नाम पर इस क़ानून का नाम रखा गया है, वे 9/11 के पीड़ितों को बचाने की कोशिश में बुरी तरह झुलस गए थे और बाद में उनकी मृत्यु हो गई.