बालाकृष्णन के ख़िलाफ़ जनहित याचिका

के जी बालाकृष्णन
Image caption बालाकृष्णन देश के पहले दलित मुख्य न्यायाधीश थे

सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष केजी बालाकृष्णन की दिक्क़तें बढ़ती जा रही हैं.

उन पर आरोप है कि उनके मुख्य न्यायाधीश रहते उनके परिवारजनों ने अपने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की.

उनके ख़िलाफ़ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें मांग की गई है कि केजी बालाकृष्णन के परिवारजनों के ज़मीन के सौदों सहित सभी आरोपों की न्यायिक जाँच होनी चाहिए और उन्हें मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाया जाना चाहिए.

इस बीच केरल सरकार ने उनके दामाद, श्रीनिजन के ख़िलाफ़ सतर्कता विभाग की तरफ से जाँच शुरु कर दी है और पार्टी के दबाव में उन्हें युवक कांग्रेस से इस्तीफ़ा देना पड़ा है.

क्लीन चिट

जहाँ बालाकृष्णन और श्रीनिजन ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है वहीं केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने उन्हें क्लीन चिट देते हुए कहा है कि बालाकृष्णन के ख़िलाफ़ अपने पद के दुरुपयोग के कोई सबूत नहीं हैं.

उन्होंने कहा, “मैने एक भी दस्तावेज़ या कागज़ का टुकड़ा नहीं देखा. ये बस आरोप हैं जो केवल टीवी चैनलों और अखबारों में आ रहे हैं.”

उनका कहना था, “उनके जज के तौर पर कामकाज और उनके दामाद की संपत्ति ग्रहण करने में कोई संबंध नहीं है.”

उधर केरल के एडवोकेट जनरल ने केजी बालाकृष्णन के भाई के जी भास्करण को स्पेशल गवर्नर्मेंट प्लीडर या सरकार का पक्ष रखने वाले वकील के पद से इस्तीफ़ा देने को कहा है.

उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने नाम पर पंजीकृत संपत्तियों को कम आंक कर दिखाया था.

लेकिन इस्तीफ़ा मांगे जाने के बाद से वे छुट्टी पर चले गए हैं.

केरल के मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने इन आरोपों को गंभीर बताया और कहा कि इसकी जाँच जल्द से जल्द होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “मैने गृहमंत्री को श्रीनिजन के ख़िलाफ़ मिली शिकायतें सौंप दी है और उन्हें इसकी जाँच करने को कहा है. मामले को अविलंब देखा जाना चाहिए और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए.”

दामाद का इस्तीफ़ा

श्रीनिजन पेशे से वकील है और वह युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे.

एक मलयालम टीवी चैनल ने आरोप लगाया था कि श्रीनिजन ने चार साल में सात करोड़ से ज़्यादा मूल्य की ज़मीन जायदाद ख़रीदी.

इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वीआर कृष्णा अय्यर ने इसकी न्यायिक जांच की मांग की थी.

अय्यर ने एक वक्तव्य में कहा है कि संसद और प्रधानमंत्री को एक उच्च स्तरीय आयोग गठित कर मामले की जांच करनी चाहिए.

उन्होंने ये भी कहा कि भारत के राष्ट्रपति को बालाकृष्णन का इस्तीफ़ा ले लेना चाहिए.

जब आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया तो युवक कांग्रेस ने श्रीनिजन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था.

इन नोटिस के जवाब में उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है जिसे पार्टी ने स्वीकार भी कर लिया है.

वे बालाकृष्णन की बेटी केजी सोनी के पति हैं और वर्ष 2006 में उन्होंने एर्नाकुलम के एक विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. लेकिन जीत नहीं सके थे.

सारा मामला 2007 और 2010 के बीच उनकी संपत्ति में तेज़ी से हुई वृद्धि का है.

जनहित याचिका

सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दिल्ली के ही एक वकील मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है.

इस याचिका में कहा गया है कि परिजनों की आय से अधिक संपत्ति के विवाद की न्यायिक जाँच की जाए और केजी बालाकृष्णन को मानवाधिकार आयोग के प्रमुख के पद से हटाया जाए.

इस याचिका में कहा गया है कि जब बालाकृष्णन सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे तब उनके दामाद श्रीनिजन ने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की.

उनका कहना है कि वर्ष 2006 में जब श्रीनिजन ने विधानसभा का चुनाव लड़ा था तब उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 25 हज़ार रुपए बताई थी लेकिन जब बालाकृष्णन मुख्य न्यायाधीश थे तो उन्होंने सात करोड़ रुपए की संपत्तियाँ ख़रीदीं.

संबंधित समाचार