नेपाल में फिर संकट के बादल

नेपाल में माओवादियों ने कहा है कि अगर अगर पूर्व योजना के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र का मिशन अगले हफ़्ते ख़त्म कर दिया जाता है तो, देश में शांति प्रक्रिया ख़तरे में पड़ सकती है.

संयुक्त राष्ट्र का अभियान 2007 में शुरु हुआ था ताकि माओवादियों और सरकार के बीच शांति समझौते के पालन की निगरानी की जा सके.

2007 में करीब दस सालों के संघर्ष के बाद दोनों पक्षों के बीच शांति समझौता हुआ था.

संयुक्त राष्ट्र अभियान का एक बड़ा मकसद ये है कि वो करीब 20 हज़ार पूर्व माओवादी विद्रोहियों पर नज़र रखेगी जिन्हें नेपाल में विभिन्न शिविरों में रखा गया है.

शांति समझौते के तहत तय हुआ था कि इन पूर्व विद्रोहियों को देश की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा या फिर नेपाल के सुरक्षाबलों में जगह मिलेगी.

माओवादियों का विरोध

बीबीसी संवाददाता जोआना जॉली का कहना है कि इस दिशा में कोई ख़ास प्रगति नहीं हुई है लेकिन नेपाल सरकार ने पिछले साल ये तय कर लिया था कि संयुक्त राष्ट्र अभियान की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी.

माओवादी नेताओं ने इस पर अपना विरोध जताते हुए संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखा है. उनका कहना है कि वे इस बात से ख़ुश नहीं है कि पूर्व विद्रोहियों और उनके हथियारों की निगरानी अब सरकार की समिति करेगी.

लेकिन नेपाल सरकार का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के अभियान को और न बढ़ाने का फ़ैसला बदला नहीं जाएगा.

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