‘बीपी जैसी दुर्घटनाएं दोहराने का ख़तरा’

  • 6 जनवरी 2011
मेक्सिको की खाड़ी में तेल रिसाव

2010 में मैक्सिको की खाड़ी में हुए तेल रिसाव को लेकर अमरीकी आयोग की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और तेल उद्योग ने अगर इस मामले में सुधारात्मक कदम नहीं उठाए तो ऐसी दुर्घटनाएं फिर हो सकती हैं.

आयोग का कहना है कि तेल उत्पादक कंपनी बीपी के तेल के कुँए में हुए इस हादसे से जुड़ी सभी कंपनियों ने समय और धन बचाने के लिए ऐसे कदम उठाए जो इस दुर्घटना की वजह बने.

राष्ट्रपति की ओर से गठित इस आयोग ने 48 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि तेल कंपनियों की ओर से इस तरह की लापरवाही लगातार हो रही है.

आयोग का मानना है कि इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ज़रूरी है कि सरकार, तेल उद्योग के लिए कड़ी नीतियां बनाए और उन्हें सख़्ती से लागू करे.

आयोग का कहना है कि बीपी के पास इस दुर्घटना को रोकने और सुरक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी इंतज़ाम नहीं थे.

दुर्घटना

अप्रैल 2010 में एक कुँए में आग लगने के बाद 11 लोगों की मौत हो गई थी और तेल का रिसना शुरु हो गया था.

काफ़ी कोशिशों के बाद 15 जुलाई को रिसाव बंद किया जा सका था. 87 दिनों के दौरान करीब 49 लाख बैरल तेल खाड़ी के पानी में रिस गया जिसमें केवल आठ लाख बैरल को ही अलग किया जा सका है.

आयोग के अनुसार, ''हो सकता है यह गैर इरादतन हो लेकिन बीपी कंपनी की ओर से लिए गए जिन फैसलों के चलते तेल के कुँए में विस्फोट हुआ उनसे कंपनी का काफ़ी पैसा और समय बचा था.''

इस राष्ट्रीय आयोग का गठन बीपी की ओर से की गई ग़लतियों और सरकारी नीतियों में बदलाव की ज़रूरत के बारे में जानकारी के लिए किया गया था.

आयोग का कहना है कि हादसे का शिकार हुए तेल के इस कुँए में जो हालात पैदा हो गए थे उसके बाद इस विस्फोट को रोकना नामुमकिन था.

विस्फोट को लेकर रिपोर्ट में खास तौर पर कुछ वजहों का ज़िक्र किया गया है. जैसे कुँए की धरती को सील करने के लिए बनाए गई रुपरेखा में ख़ामियां और वहां काम कर रहे लोगों की ओर से विस्फोट के संकेतों को समय रहते न पकड़ा पाना.

आयोग ने चेतावनी दी है कि इस हादसे से सबक लेते हुए सरकार और तेल कंपनियों ने अगर अपने ढांचे और कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया तो इन दुर्घटनाओं के फिर दोहराने का ख़तरा है.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार