माँ-बाप का ध्यान रखने के लिए क़ानून

  • 6 जनवरी 2011
Image caption चीन में बड़ी संख्या में वृद्ध अकेले रह गए हैं

बुढ़ापे में माँ-बाप देखभाल करना बच्चों की नैतिक ज़िम्मेदारी तो है लेकिन अब इससे एक क़दम आगे बढ़कर चीन में सरकार इसे बच्चों की क़ानूनी ज़िम्मेदारी बनाने पर विचार कर रही है.

नए प्रस्तावित क़ानून के तहत यह बच्चों की क़ानूनी ज़िम्मेदारी होगी कि वे अपने बुज़ुर्ग माता-पिता से मिलते रहें और उनकी देखभाल करें.

अगर बच्चे इस ज़िम्मेदारी का पालन नहीं करते तो माँ-बाप उपेक्षा के ख़िलाफ़ मुआवज़ा हासिल करने के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं.

चीन में परंपरागत रूप से अधिकतर बच्चे माँ-बाप का खयाल रखते हैं लेकिन रोज़गार की तलाश में बच्चों के दूर चले जाने या आर्थिक दबावों के कारण अब परंपरागत व्यवस्था चरमरा रही है.

चीन में लगभग 12 प्रतिशत आबादी 60 साल से ऊपर की आयु वाले लोगों की है जिनमें से आधे से अधिक लोग अकेले रहते हैं.

चीन में एक संतान की नीति की वजह से कई लोग ऐसे हैं जिनकी एकमात्र संतान उनसे दूर चली गई है और वे बिल्कुल अकेले रह गए हैं.

चीन में फ्लैटों से कई दिनों बाद बुज़ुर्गों की लाशें निकलने की अनेक घटनाओं ने परंपरागत चीनी समाज को झकझोर दिया है.

चीन 1996 में एक क़ानून बनाया गया था जिसके तहत बुज़ुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है अब उसी क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि वृद्धों के बच्चों को क़ानूनन ज़िम्मेदार बनाया जा सके.

हालाँकि कई लोगों का कहना है कि इस क़ानून का पालन कराना मुश्किल काम होगा और कई व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने आएँगी.

एक वकील कियान जून का कहना था, "ऐसा कोई कानून बनाने से बेहतर है कि बच्चों को स्कूल से ही नैतिक शिक्षा दी जाए कि माता-पिता का ध्यान रखना उनका कर्तव्य है."

चीन में दस लाख से अधिक लोग 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं.

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