आंध्र प्रदेश के राज्यपाल को लेकर तूफ़ान

  • 10 जनवरी 2011
ई एस एल नरसिम्हन
Image caption आंध्र प्रदेश के गवर्नर नरसिम्हन को वापस बुलाने की मांग

तेलंगाना राज्य के लिए चल रहा आन्दोलन अब एक ऐसे राजनीतिक तूफ़ान का रूप धारण करता जा रहा है जिसकी चपेट में न केवल सारे राजनीतिक दल बल्कि राज्यपाल इ एस एल नरसिम्हन भी आ गए हैं.

आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के नेताओं समेत राज्य के लगभग सभी राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार से श्री नरसिम्हन को वापस बुलाने की मांग की है.

उनका आरोप है की नरसिम्हन तेलंगाना विरोधी है और राज्य में तेलंगाना आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं.

तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी और तेलुगु देसम के साथ साथ कांग्रेस के कुछ तेलंगाना समर्थक नेताओं ने राज्य में अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती के लिए राज्यपाल को ज़िम्मेदार ठहराया है.

टीआरएस और भाजपा का आरोप है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन जैसी स्थिति है क्योंकि राज्यपाल प्रशासन में हस्तक्षेप कर रहे हैं और मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को किनारे कर दिया गया है.

कांग्रेस के सांसद मधु याश्की ने कहा कि राज्यपाल केंद्र को गलत सूचनाएं दे रहे हैं कि अगर तेलंगाना राज्य बनता है तो वो माओवादियों के हाथ में चला जाएगा.

यहाँ इस बात को काफी महत्व दिया जा रहा है की मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी की दिल्ली यात्रा को आख़िरी क्षण में रद्द कर दिया गया और उनकी जगह केंद्र सरकार ने राज्यपाल नरसिम्हन को दिल्ली बुला लिया.

इसे इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अगर हालात क़ाबू से बाहर होते हैं और तेलंगाना के कांग्रेसी विधायक त्याग पत्र देकर संकट खड़ा करते हैं तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करके नरसिम्हन अपनी योजना अनुसार काम करते हुए तेलंगाना के आन्दोलन को दबाने की कोशिश कर सकते हैं.

गहराते संकट के बादल

कांग्रेस और तेलुगु देसम में हालात जिस तेज़ी से करवट ले रहे हैं उससे लगता है कि आंध्र प्रदेश एक बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ रहा है.

तेलंगाना के कांग्रेसी नेता एक दो दिन में फिर बैठक करके आगे की रणनीति तैयार करने वाले हैं.

उनमें से कई लोगों ने तय किया है कि अगर संसद के आगामी बजट अधिवेशन में तेलंगाना का विधेयक पेश नहीं होता तो वो त्याग पत्र दे देंगे.

इधर तेलुगु देसम के एन जनार्दन रेड्डी के नेतृत्व में कई विधायक बग़ावत की तैयारी कर रहे हैं.

उनकी मांग है कि नायडू तेलंगाना में तेलुगु देसम की एक अलग शाखा स्थापित करें ताकि लोगों को यह विश्वास हो कि तेलंगाना के मुद्दे पर पार्टी गंभीर है.

लेकिन चंद्रबाबू नायडू ऐसा नहीं करना नहीं चाहते. उन्होने तेलंगाना और आंध्र दोनों को अपनी दो आँखें बताते हुए दोनों ही क्षेत्रों को ख़ुश रखने की नाकाम कोशिश की है.

लेकिन प्रजा राज्यम पार्टी ने चेतावनी दी है की "दो आँखों की नीति के चलते कहीं तेलुगु देसम को दोनों ही आँखों से हाथ न धोना पड़ जाए".

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