दुनिया भर में मंहगाई की मार

अल्जीरिया
Image caption अल्जीरिया में सात जनवरी को खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुआ.

खाद्य पदार्थों की क़ीमतों पर लगाम लगाने के लिए जूझ रही भारत सरकार दुनिया में अकेली नहीं है. संयुक्त राष्ट्र की 'खाद्य और कृषि संस्था' के 'खाद्य पदार्थ मूल्य सूचकांक' के अनुसार इस समय दुनिया में रिकॉर्ड महंगाई का दौर चल रहा है.

'खाद्य और कृषि संस्था' की पिछले सप्ताह आई रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2008 के बाद इस समय विश्व भर में खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था के 'खाद्य पदार्थ मूल्य सूचकांक' में मूल्यों में मासिक परिवर्तन का लोखा-जोखा पेश किया जाता है.

इस सूचकांक में दलहन, डेरी उत्पाद, मांस, तेल और चीनी की क़ीमतों को मॉनिटर किया जाता है.

दुनिया भर से एकत्रित किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि कैसे चीन, विएतनाम और ब्राज़ील में खाद्य पदार्थों की क़ीमतें लगातार बढ़ती जा रहीं हैं.

चिंताएं

Image caption ब्राज़ील, विएतनाम, अल्जीरिया, श्रीलंका जैसे देशों में भी खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

रिपोर्ट के अनुसार उत्तर अफ़्रीकी देश अल्जीरिया में तो खाद्य सामग्री को लेकर दंगे भी हुए हैं. ब्राज़ील में भी खाने के सामान की क़ीमतों को लेकर काफ़ी चिंताए व्यक्त की जा रही हैं.

खाद्य और कृषि संस्था के अनुसार अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डेरी उत्पादों की क़ीमत आने वाले वक़्त में स्थिर रह सकती है लेकिन चीनी के मूल्यों में भविष्य में और बढ़ोतरी हो सकती है.

लेकिन संस्था गेहूं को लेकर सबसे अधिक चिंतित है.

रूस जैसे बड़े गेहूं उत्पादक देश में असाधारण मौसम के कारण इस वर्ष विश्व में गेहूं के उत्पादन में पांच फ़ीसदी गिरावट आने का अनुमान है. संस्था को डर है कि अधिक उपभोग के कारण इस वर्ष ये आंकड़ा 10 प्रतिशत तक जा सकता है.

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