दार्जीलिंग बंद से जनजीवन प्रभावित

  • 13 जनवरी 2011
चाय बाग़ान
Image caption दार्जीलिंग में बंध का व्यापक असर

पृथक राज्य की मांग को लेकर दार्जीलिंग में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बंद से इलाके में जनजीवन पूरी तरह से ठप पड़ गया है.

जीजेएम ने 27 दिन के बंद का फैसला किया था जिससे धीरे धीरे लागू किया जाएगा.

असर

बंद के कारण दार्जीलिंग, कालिंपोंग और कुरसियोंग में दुकाने और बाज़ार बंद रहे, दफ्तर भी दूसरे दिन भी बंद रहे.

बंद के दौरान सिक्किम से आ रही गाड़ियों पर पत्थर फैंके गए. सिक्किम और सिवोक के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 31ए को रोक दिया गया.

दार्जिलिंग पुलिस के सुपरिंटेंड़ेंट डीपी सिंह ने कहा “दुकानें बंद रही और यातायात भी रोज़ से कम रहा. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध किया पर पुलिस ने रास्ता साफ कर दिया.’’

गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा, जीएनएलएफ, के तीन कार्यकर्ताओं की जीजेएम के समर्थकों से फूलबाज़ार पुलिस स्टेशन क्षेत्र में झड़प हुई जिसमें वे घायल हो गए.

जीजेएम ये बंद तीन चरणों में करेगा. पहला चरण पंद्रह जनवरी को समाप्त होगा. दूसरा चरण 18 से 25 जनवरी और तीसरा 29 जनवरी से 12 फरवरी तक रहेगा.

मांग

बिमल गुरुंग के नेतृत्व वाली जीजेएम दो साल से गोरखालैंड़ की मांग का नेतृत्व कर रही है. इस मांग को 80 के दशक से जीएनएलएफ उठा रहीं थी.

पर उन्होंने 1988 में सरकार से समझौता कर के गोरखा हिल काउंसिल चलाई थी. इसकी मियाद तीन साल पहले समाप्त हो गई थी.

जीजेएम नेता रोशन गिरी का कहना था कि “अगर तेलंगाना राज्य बनता है तो हमें भी अलग राज्य मिलना चाहिए क्योंकि हमारा क्षेत्र बंगाल से पूरी तरह से अलग है जबकि तेलंगाना और शेष आंध्र में सभी लोग तेलुगु है.’’

जीजेएम ने कई बार इस तरह के बंद किए है और 2008 से 2010 के बीच इन हड़तालों से यहाँ का चाय और पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ था.

संबंधित समाचार